Supreme Court New Judges : शीर्ष अदालत में बढ़ी न्यायाधीशों की संख्या, तीन नए नामों पर लगी मुहर

सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति से न्यायपालिका में बड़ा बदलाव हुआ है। सुनीता अग्रवाल, देवेंद्र उपाध्याय और अपरेश सिंह को शीर्ष अदालत में नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। इसे अदालत के कामकाज के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

Supreme Court New Judges

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

Supreme Court New Judges : सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को तीन नए न्यायाधीश मिले। इनमें गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं। केंद्र सरकार की ओर से नियुक्ति की घोषणा के बाद शीर्ष अदालत की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़कर 37 हो जाएगी। इस नियुक्ति के साथ सुप्रीम कोर्ट अपनी स्वीकृत न्यायाधीश क्षमता के करीब पहुंच गया है।

कानून मंत्री ने दी नियुक्तियों की जानकारी

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीनों नियुक्तियों की जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इससे पहले 28 सितंबर को तीनों नामों को शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिए अनुशंसित किया था। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हुई और केंद्र ने तीनों न्यायाधीशों की नियुक्ति अधिसूचित की।

तीनों नए न्यायाधीशों के नाम

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए तीन न्यायाधीशों में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों ने अलग-अलग हाई कोर्ट में न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं।

न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल का सफर

न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं। उनका न्यायिक करियर इलाहाबाद हाई कोर्ट से जुड़ा रहा है। उन्हें नवंबर 2011 में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अगस्त 2013 में वह स्थायी न्यायाधीश बनीं और जुलाई 2023 में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की नियुक्ति

न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत थे। उनका मूल हाई कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट है। उन्होंने जनवरी 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था। अब सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति के साथ शीर्ष अदालत में हाई कोर्ट के अनुभवी न्यायाधीश के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी शुरू होगी।

न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उनका मूल हाई कोर्ट झारखंड हाई कोर्ट है। उन्होंने जुलाई 2025 में तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था। कॉलेजियम ने उनके न्यायिक अनुभव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी।

28 सितंबर को कॉलेजियम ने भेजे थे नाम

तीनों नियुक्तियों की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 28 सितंबर की बैठक से हुई थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने तीनों मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने पर नियुक्तियां की गईं।

सुप्रीम कोर्ट में अब 37 न्यायाधीश

तीनों नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 37 हो जाएगी। इससे पहले शीर्ष अदालत में 34 न्यायाधीश कार्यरत थे। सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत क्षमता अब 38 न्यायाधीशों की है। ऐसे में तीन नियुक्तियों के बाद सिर्फ एक पद खाली रहेगा।

स्थितिसंख्या
पहले कार्यरत न्यायाधीश34
नए नियुक्त न्यायाधीश3
नियुक्तियों के बाद कार्यरत जज37
स्वीकृत न्यायाधीश क्षमता38
शेष रिक्त पद1

स्वीकृत क्षमता बढ़कर 38 हुई

सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या में 2026 में बदलाव किया गया है। पहले शीर्ष अदालत में 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत क्षमता थी, जिसे बढ़ाकर 38 किया गया। तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद अदालत इस क्षमता के लगभग पूरी तरह करीब पहुंच गई है।

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महिला प्रतिनिधित्व में भी बढ़ोतरी

न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की मौजूदगी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उनकी नियुक्ति के बाद शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या तीन हो गई है। यह सुप्रीम कोर्ट में महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ा एक उल्लेखनीय बदलाव है।

शपथ के बाद संभालेंगे जिम्मेदारी

तीनों न्यायाधीश शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे। उनकी नियुक्ति से शीर्ष अदालत में अनुभवी हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों की संख्या बढ़ेगी। वहीं, 38 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले एक पद अभी भी रिक्त रहेगा। लंबित मामलों की सुनवाई और अदालत के कामकाज पर इन नियुक्तियों का प्रभाव आगे दिखाई देगा।

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