Supreme Court: SIR मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब, चुनाव आयोग को नोटिस

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ECI को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर दिया गया

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 11, 2026

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का मामला अब उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है और जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से स्पष्ट जानकारी मांगी है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं, उनकी अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और इसका अंतिम समाधान कब तक होगा।

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अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर CJI की बेंच ने लिया एक्शन

यह कार्रवाई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।

ब्लॉक स्तर पर ट्रिब्यूनल की मांग: याचिका में मांग की गई है कि प्रभावित मतदाताओं की सुविधा के लिए पश्चिम बंगाल के प्रत्येक ब्लॉक में SIR ट्रिब्यूनल का गठन किया जाए।

समयबद्ध निपटारा: याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनाव से पहले सभी अपीलों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निपटारा होना आवश्यक है ताकि किसी भी पात्र नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार न छीने।

चुनाव आयोग से जवाब तलब: शीर्ष अदालत ने ECI को निर्देश दिया है कि वह हटाए गए नामों और उन पर आई अपीलों की मौजूदा स्थिति पर अपनी रिपोर्ट दाखिल करे।

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और ट्रायल कोर्ट जजों की तैनाती

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 10 मार्च को एक अहम आदेश जारी किया था, जिसमें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्वतंत्र अपीलेट ट्रिब्यूनल के गठन की व्यवस्था दी गई थी।

रिटायर्ड जजों को जिम्मेदारी: इन अपीलेट ट्रिब्यूनलों की कमान संबंधित हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को सौंपी गई है, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके।

ट्रायल कोर्ट के जजों की अनुमति: प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों—ओडिशा और झारखंड—में भी SIR से जुड़ी शिकायतों के निपटारे हेतु ट्रायल कोर्ट के जजों की तैनाती को मंजूरी दी थी।

मकसद: इस त्रि-स्तरीय व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल प्रक्रियात्मक या तकनीकी त्रुटियों के कारण कोई भी वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।

पश्चिम बंगाल में बड़ा आंकड़ा

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है।

विवरण आंकड़े / प्रतिशत

SIR से पहले कुल मतदाता लगभग 7.66 करोड़

ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नाम 7.08 करोड़ से अधिक

लिस्ट से हटाए गए कुल नाम 58.20 लाख

प्रभावित मतदाताओं का प्रतिशत कुल मतदाताओं का लगभग 7.6%

इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटने के कारण राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अपीलों के निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले दिनों में निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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