Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर प्रदर्शन में लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, बनाई हाई लेवल कमेटी

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड जांच समिति के गठन का आदेश दिया है। समिति पुलिस, अर्धसैनिक बलों और प्रदर्शनकारियों की भूमिका की जांच करेगी तथा बल प्रयोग, पैलेट गन, आंसू गैस और महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोपों की भी समीक्षा करेगी।

Jantar Mantar Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 20, 2026

Jantar Mantar Protest : सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर किए गए अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन किया है। यह कमेटी देशभर में परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़े घटनाक्रमों की विस्तृत जांच करेगी। अदालत का मानना है कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा एजेंसियों दोनों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल आवश्यक है।

पूर्व जज आर. सुभाष रेड्डी को मिली कमान

इस जांच समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई को भी शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुभवी न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल कर समिति को व्यापक अधिकार दिए हैं।

किन आरोपों की होगी जांच?

कमेटी पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के कथित अत्यधिक उपयोग की जांच करेगी। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा, भीड़ नियंत्रण के तौर-तरीकों, निगरानी गतिविधियों और पीड़ितों को चिकित्सा सहायता एवं मुआवजा देने से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। समिति यह भी देखेगी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान अपनाए गए कदम उचित थे या नहीं।

सुरक्षा बलों पर हमलों और संपत्ति नुकसान की भी पड़ताल

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल प्रदर्शनकारियों की शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी। समिति उन आरोपों की भी जांच करेगी जिनमें सुरक्षा कर्मियों पर हमले, सरकारी आदेशों की अवहेलना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बातें सामने आई हैं। अदालत का उद्देश्य घटनाओं की निष्पक्ष तस्वीर सामने लाना है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही दिए थे संकेत

मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संकेत दिया था कि प्रस्तावित समिति में हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और एक सेवानिवृत्त डीजीपी को शामिल किया जाएगा। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने कहा था कि समिति के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर विचार करने के बाद औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा।

फेशियल रिकग्निशन और निजता पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फेशियल रिकग्निशन तकनीक के उपयोग, निगरानी व्यवस्था, निजता के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े सवाल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।

छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने के संकेत

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने की संभावना पर भी विचार व्यक्त किया। अदालत ने संकेत दिया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग कर कुछ मामलों में राहत दी जा सकती है। हालांकि गंभीर आपराधिक आरोपों वाले मामलों को अलग श्रेणी में रखा जाएगा और उन पर अलग से विचार होगा।

संसद मार्च के बाद बढ़ा विवाद

20 जुलाई को दिल्ली में हजारों छात्रों ने संसद मार्च में हिस्सा लिया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की थी। जब कुछ प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने और बैरिकेड्स पार करने लगे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इसी कार्रवाई को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट की गठित समिति विस्तृत जांच करेगी।

Read More  :  Bangladesh President 2026: मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बने नए राष्ट्रपति, 255 वोटों से जीते चुनाव