Form 6 News: मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने चुनाव आयोग के नए फॉर्म-6 को न तो मंजूरी दी है और न ही इसकी वैधता पर कोई न्यायिक फैसला सुनाया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत की पिछली टिप्पणियों को संदर्भ से अलग करके खबरों में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। इस स्पष्टीकरण के बाद फॉर्म-6 और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही बहस फिर चर्चा में आ गई है।
1. नए फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम स्पष्टीकरण दिया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने स्पष्ट किया कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामले में नए फॉर्म-6 पर कोई विचार नहीं किया गया था। अदालत ने न तो इस फॉर्म को मंजूरी दी थी और न ही इसकी वैधता पर कोई फैसला सुनाया था।

2. चुनाव आयोग के दावे पर क्यों उठा विवाद?
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान फॉर्म-6 का मुद्दा फिर सामने आया। इससे पहले 26 सितंबर को आयोग ने एक बयान में दावा किया था कि फॉर्म-6 के साथ मतदाताओं से अतिरिक्त घोषणा-पत्र लेने की व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। हालांकि, शीर्ष अदालत की टिप्पणी के बाद आयोग के इस दावे की व्याख्या को लेकर सवाल उठने लगे।
3. सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या कहा?
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने प्रिया मिश्रा की याचिका सुनवाई के लिए आई। इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने नए फॉर्म-6 को लेकर आयोग के दावे और अदालत की टिप्पणी के बीच अंतर स्पष्ट करने की मांग की।
4. न्यायमूर्ति बागची ने स्थिति की स्पष्ट व्याख्या की
वकील की दलील पर न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा कि नए फॉर्म-6 के संबंध में अदालत ने कोई निर्णय नहीं दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार एसआईआर मामले में फैसला सुनाए जाने के समय नया फॉर्म-6 विचाराधीन मुद्दा ही नहीं था। इसलिए अदालत की ओर से इस फॉर्म को मंजूरी देने या खारिज करने का प्रश्न नहीं उठता। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इस विषय पर आगे विचार किया जा सकता है।

5. 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संबंधित मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोपों को चुनौती देने वाली याचिका पर भी साथ में सुनवाई की जाएगी। ऐसे में फॉर्म-6 और चुनाव आयोग की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
6. आखिर क्या है फॉर्म-6 और पूरा विवाद?
फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र भी मांगा गया। इसमें आवेदकों को बताना था कि पिछले एसआईआर में उनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।
इस अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ। मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने आपत्ति जताई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई और आयोग की प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। हालांकि, अदालत ने अभी फॉर्म-6 की वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
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