Rahul Gandhi March: राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के विपक्षी सांसद और नेता सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर रहे हैं। इस मार्च को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरी कवायद को राजनीतिक दिखावा और नौटंकी करार दिया।
सड़क पर मार्च निकालने की क्या जरूरत है?

बताते चले कि, शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश से मिलने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है। कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से जब चाहे, उनसे मिलने नहीं पहुंच सकता। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुलाकात का एक तरीका मौजूद है, तो सड़क पर मार्च निकालने की क्या जरूरत है?
राहुल गांधी की ‘शिव की बारात’ वाले बयान पर BJP का पलटवार
दरअसल, राहुल गांधी ने विपक्षी गठबंधन के इस मार्च को शिवजी की बारात बताया था। उनके इस बयान पर भी शिवराज सिंह चौहान ने निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कल तक भगवान श्रीराम का विरोध करते थे, वे आज भगवान शिव की बात कर रहे हैं।शिवराज ने कांग्रेस के इस कदम को लेकर कहा कि यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता देश में अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं। भाजपा नेता ने मार्च में शामिल लोगों पर भी सवाल उठाए और इसे गुंडों का समूह तक बता दिया।
कांग्रेस की चुनावी हार के लिए कौन जिम्मेदार? शिवराज ने उठाए सवाल
भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले कई वर्षों से चुनाव में हार मिलने के बाद निर्वाचन आयोग और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती रही है। उनके मुताबिक, कांग्रेस को अपनी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी की परेशानी की असली वजह उसका विचार-शून्य नेतृत्व है। उनके अनुसार, कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरियों को स्वीकार करने के बजाय दूसरी संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराती है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस के आंदोलन पर भी उन्होंने सवाल उठाए। शिवराज ने कहा कि अगर किसी संस्था से शिकायत है, तो उसके समाधान के लिए संवैधानिक और कानूनी रास्ते अपनाए जाने चाहिए, न कि सड़कों पर ऐसा प्रदर्शन किया जाना चाहिए।
कांग्रेस के नेतृत्व पर शिवराज सिंह चौहान का निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के अंदर नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में नेतृत्व को लेकर विवाद है और इसका असर उसकी राजनीतिक स्थिति पर पड़ रहा है। चौहान ने दावा किया कि कांग्रेस आज देश के कई राज्यों में अपने दम पर राजनीति करने के बजाय दूसरी पार्टियों के सहारे खड़ी है।
उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर निर्भर है। उत्तर प्रदेश में कभी समाजवादी पार्टी तो कभी बहुजन समाज पार्टी के सहारे राजनीति करती है। वहीं, झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थन पर टिकी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर बढ़ी सियासी बयानबाजी
राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी नेताओं के इस मार्च ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। एक तरफ विपक्षी गठबंधन अपने विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी बात सामने रखना चाहता है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व की कमजोरी से जोड़कर देख रही है।

फिलहाल, शिवराज सिंह चौहान के बयानों से साफ है कि इस मार्च को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विपक्ष इस विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों को कितना प्रभावी ढंग से उठा पाता है और भाजपा के हमलों का कांग्रेस किस तरह जवाब देती है।










