Sumitra Chatterjee BJP: बंकिम परिवार की सुमित्रा चटर्जी भाजपा में शामिल, बंगाल चुनाव से पहले बड़ा दांव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वंशज सुमित्रा चटर्जी ने भाजपा का दामन थाम लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बंकिम बाबू की विरासत और उनके ऐतिहासिक घर की अनदेखी की है। क्या यह मोड़ बंगाल की सत्ता का रुख बदल देगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 26, 2026

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Sumitra Chatterjee BJP: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही प्रतीकों और विरासत की जंग तेज हो गई है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को ‘बंकिमदा’ कहे जाने पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। विपक्ष ने इसे बंगाल के महान विद्वान का अपमान बताया था। हालांकि, अब इस विवाद के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बंकिम चंद्र चटर्जी के परिवार की सदस्य सुमित्रा चटर्जी ने आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। गुरुवार को साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में ‘पद्म शिबिर’ का झंडा थामा।

विरासत की राजनीति और ‘अपमान’ के घावों पर मरहम

राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है कि क्या भाजपा ने सुमित्रा चटर्जी को पार्टी में शामिल कर ‘बंकिमदा’ वाले विवाद से हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की है। तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल अक्सर भाजपा पर बंगाल के बुद्धिजीवियों और महापुरुषों के प्रति अनभिज्ञता और उनके अपमान का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में बंकिम परिवार के सदस्य का भाजपा में आना एक मजबूत प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है। सत्ताधारी दल का कहना है कि यह केवल चुनावों के मद्देनजर एक रणनीतिक कदम है ताकि यह साबित किया जा सके कि भाजपा बंगाल की अस्मिता और महान विभूतियों का कितना सम्मान करती है।

ममता सरकार की रोजगार नीति पर सुमित्रा चटर्जी का कड़ा प्रहार

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते ही सुमित्रा चटर्जी ने राज्य की वर्तमान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की रोजगार नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक प्रशासनिक आदेश के जरिए एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज से लाखों युवाओं का डेटा डिलीट कर दिया गया। सुमित्रा ने कहा, “एम्प्लॉयमेंट बैंक में 40 लाख युवाओं के पंजीकरण के बावजूद ‘युवा श्री’ और अब ‘युवा साथी’ जैसी योजनाएं युवाओं की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही हैं।” उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वे बंगाल के शिक्षित युवाओं की नाराजगी को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।

भूपेंद्र यादव का बयान: ‘विकसित बंगाल’ के लिए बंकिम के आदर्श जरूरी

सुमित्रा चटर्जी का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बंकिम चंद्र चटर्जी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की बुनियाद है। यादव ने जोर देकर कहा कि बंकिम बाबू की राष्ट्रवादी सोच ही पश्चिम बंगाल को ‘विकसित बंगाल’ बनाने की प्रेरणा देगी। भाजपा को उम्मीद है कि सुमित्रा चटर्जी के आने से न केवल पार्टी की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ेगी, बल्कि यह उन आरोपों का भी जवाब होगा जिनमें भाजपा को ‘बाहरी’ या बंगाली संस्कृति से दूर बताया जाता रहा है।

विधानसभा चुनाव और बैलेट बॉक्स पर संभावित प्रभाव

अब सवाल यह उठता है कि क्या बंकिम भावना का यह कार्ड आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा? बंगाल में बुद्धिजीवियों का एक बड़ा वर्ग भाजपा की विचारधारा पर सवाल उठाता रहा है। भाजपा इस शामिल होने के जरिए अपनी छवि को ‘प्रो-बंगाली’ और सांस्कृतिक रूप से जागरूक बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात पर बहस जारी है कि क्या इस तरह की प्रतीकात्मक जॉइनिंग का असर उन जमीनी कार्यकर्ताओं और मज़दूरों पर पड़ेगा जो साल भर खेतों और कारखानों में पसीना बहाते हैं, या फिर यह केवल शहरी मध्यम वर्ग को प्रभावित करने तक सीमित रहेगा।

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