Sumit Roy Bail : सुमित रॉय की अग्रिम जमानत पर SC में सुनवाई, ₹30 करोड़ लेन-देन पर सवाल

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कथित ₹30 करोड़ के लेन-देन का मुद्दा उठा। अदालत ने पूछताछ के transcript और audio-video records मांगे हैं। रॉय की गिरफ्तारी से सुरक्षा 7 सितंबर तक बढ़ी है। अब इन रिकॉर्ड्स से जांच की दिशा और कई सवालों पर तस्वीर साफ होगी।

Sumit Roy Bail

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 31, 2026

Sumit Roy Bail : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के पूर्व आप्त-सहायक (PA) सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार, 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामला पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी में जमीन से जुड़े एक प्रकरण और उससे संबंधित जांच से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी की कार्रवाई, कथित वित्तीय लेन-देन और ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस हुई।

जांच में ₹30 करोड़ के कथित लेन-देन का उल्लेख

केंद्र और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कथित तौर पर करीब 30 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन का उल्लेख किया। उनके अनुसार, जांच के दौरान एक राजनीतिक दल के खाते से कथित रूप से लगभग 30 करोड़ रुपये की राशि ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से जुड़े खाते में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने अदालत के सामने जांच में सामने आए इन वित्तीय लेन-देन को महत्वपूर्ण बताया।

जांच आगे बढ़ने पर और जानकारी मिलने का दावा

सॉलिसिटर जनरल ने कथित वित्तीय गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में सामने आई रकम को पूरी जांच का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे कथित तौर पर “हिमशैल की चोटी” के समान बताते हुए कहा कि जांच आगे बढ़ने पर अन्य लेन-देन और संभावित बेनामी संपत्तियों से संबंधित जानकारियां भी सामने आ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुमित रॉय से मामले से संबंधित सवाल पूछे गए हैं और पूछताछ की वीडियोग्राफी समेत अन्य सामग्री अदालत के समक्ष उपलब्ध कराई जाएगी।

बचाव पक्ष ने पूछताछ की प्रक्रिया पर जताई आपत्ति

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने जांच एजेंसी की पूछताछ के तरीके पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष का कहना था कि उनके मुवक्किल से लगातार करीब 11 दिनों तक कई घंटे पूछताछ की गई। वकील ने दावा किया कि जिस मूल मामले के आधार पर जांच शुरू हुई थी, उससे जुड़े सवालों पर पूछताछ में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने इसी आधार पर जांच की दिशा और एजेंसी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई।

जांच की गति पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने जांच की प्रगति और एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल किए। अदालत ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि जांच में ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ का संदर्भ जितना कम आए, जांच एजेंसी के लिए उतना बेहतर होगा। पीठ ने जांच की गति में कथित असंगति को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया।

निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह संकेत दिया गया कि जांच लगातार और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़नी चाहिए। जांच में कभी अत्यधिक धीमी गति और फिर अचानक तेजी आने को लेकर भी पीठ ने सवाल उठाए। अदालत ने जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने को महत्वपूर्ण माना।

पूछताछ का पूरा रिकॉर्ड अदालत में होगा पेश

सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय से हुई पूछताछ का विस्तृत लिखित ट्रांसक्रिप्ट और संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब अदालत इन रिकॉर्ड के जरिए यह भी देख सकती है कि पूछताछ किस तरीके से की गई और जांच एजेंसी ने किन सवालों एवं तथ्यों पर ध्यान केंद्रित किया। रिकॉर्ड की समीक्षा मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण हो सकती है।

अगली सुनवाई अगले सोमवार को

सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम फैसला फिलहाल नहीं दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार निर्धारित की गई है। उस दौरान पूछताछ का रिकॉर्ड और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाने की उम्मीद है। कथित वित्तीय लेन-देन और अन्य आरोपों पर अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।

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