West Bengal Politics: केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुकांत मजूमदार ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर एक अत्यंत गंभीर और विवादास्पद दावा किया है। मजूमदार के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में राज्य की जनसांख्यिकी (Demographics) में इतनी तेजी से बदलाव आ रहा है कि आने वाले समय में कई जिलों में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में हिंदू उम्मीदवारों के लिए चुनाव जीतना लगभग असंभव हो जाएगा। 2026 के विधानसभा चुनाव को उन्होंने बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई करार दिया है।
हिंदू मतदाताओं के राजनीतिक भविष्य पर मजूमदार की चिंता
मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान सुकांत मजूमदार ने राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी और घटते हिंदू अनुपात (Population Ratio) पर अपनी बात रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मुस्लिम आबादी 33 से 35 प्रतिशत के बीच पहुँच चुकी है। मजूमदार का तर्क है कि इस जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Shift) के कारण चुनावी गणित पूरी तरह बदल जाएगा। उनके अनुसार, यदि टीएमसी सत्ता में बनी रहती है, तो 2026 का चुनाव आखिरी मौका होगा जब बंगाली हिंदू मतदाता राज्य के राजनीतिक नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में होंगे।
बूथ स्तर पर भाजपा की नई ‘बंगाल-केंद्रित’ चुनावी रणनीति
2021 की चुनावी हार से सबक लेते हुए भाजपा ने अपनी रणनीति में व्यापक बदलाव किया है। सुकांत मजूमदार ने बताया कि अब पार्टी का मुख्य फोकस ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के माध्यम से मतदाता सूची (Voter List) को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है। भाजपा का मानना है कि फर्जी मतदाताओं को हटाकर और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करके ही चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में किया जा सकता है। पार्टी अब दिल्ली के बजाय ‘बंगाल-केंद्रित’ स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दे रही है, ताकि बंगाली अस्मिता और सुरक्षा के सवाल पर जनता को एकजुट किया जा सके।
भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की राजनीतिक भविष्यवाणी
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि आबादी में बदलाव के कारण भविष्य में टीएमसी को हिंदू उम्मीदवारों के बजाय मुस्लिम प्रत्याशियों को अधिक टिकट देने के लिए विवश होना पड़ेगा। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य में अब एक मुस्लिम उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाने की मांगें उठने लगी हैं। मजूमदार ने आशंका जताई कि यदि यही रुझान जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री भी इसी समुदाय से होगा। उन्होंने इसे राज्य की सत्ता संरचना (Power Structure) में होने वाला एक स्थायी बदलाव बताया।
बंगाल को ‘अफगानिस्तान-पाकिस्तान’ बनने से बचाने का संकल्प
मजूमदार ने अपने संबोधन में ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ और विभाजन के काले दौर का जिक्र करते हुए सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में हो रहा घुसपैठ और जनसांख्यिकीय असंतुलन राज्य को पाकिस्तान या अफगानिस्तान जैसी कट्टरपंथी दिशा में धकेल सकता है। उनके अनुसार, भाजपा के खिलाफ मुस्लिम समुदाय का एकजुट होकर मतदान करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन वे बंगाली हिंदू मतदाताओं के ध्रुवीकरण और टीएमसी से उनके मोहभंग पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महासंग्राम है।









