Somnath Mandir: भाजपा नेता सुशांशु त्रिवेदी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु और कांग्रेस पर निशाना साधा है।भाजपा नेता ने आरोप लगाए हैं कि,पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया।
PM Modi On Somnath Temple: ‘सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, भारत के पुनरुत्थान का प्रतीक है’, हमले के 1000 साल पर भावुक हुए प्रधानमंत्री
सोमनाथ मंदिर पर BJP सांसद का बड़ा आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट पर भाजपा नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि,पंडित नेहरू नहीं चाहते थे कि किसी भी हालत में सोमनाथ मंदिर का निर्माण हो।भाजपा नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ पुराने पत्रों को साझा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
पत्र साझा कर पंडित नेहरु पर लगाए गंभीर आरोप

सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाए कि,जवाहर लाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के संबंध में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को एक पत्र लिखा था।इस पत्र में उन्होंने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक दरवाजों की कहानी को झूठा बताया साथ ही नेहरू ने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को सोमनाथ मंदिर के निर्माण कार्य से दूर रहने का आग्रह किया साथ ही साथ उद्घाटन समारोह में भी जाने से मना किया।
सोमनाथ मंदिर के अभिषेक का मामला
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया कि,पंडित नेहरू ने भारत के तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को पत्र लिख कर सोमनाथ मंदिर के अभिषेक समारोह की कवरेज को कम करने के लिए भी कहा।
नेहरु पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप

इसी के साथ पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिख कर सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी तरह की सहायता देने से साफ मना किया,जिसमें अभिषेक समारोह के लिए नदी से पानी के अनुरोध भी शामिल थे।सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि,नेहरू अपने राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्राध्यक्ष को एक बड़े हिंदू सभ्यतागत कार्यक्रम से दूर रखने की सक्रिय कोशिश कर रहे थे।
भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति का भी जिक्र
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने अपने पत्र में आगे लिखा कि,सेक्रेटरी-जनरल और विदेश मंत्रालय के विदेश सचिव को भी पंडित नेहरू ने पत्र लिखा और निर्देश दिया कि…दूतावासों को सोमनाथ ट्रस्ट से पवित्र नदी के पानी के लिए आने वाले अनुरोधों पर बिल्कुल भी ध्यान न देने का निर्देश दिया जाए।जो हिंदू धार्मिक गतिविधियों के प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों से भी उनकी स्पष्ट बेचैनी को दर्शाता है।उन्होंने स्वीकार किया कि,इससे पहले ही भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद और के.एम.मुंशी दोनों को अपनी नाराजगी बता दी थी।










