Subhendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब महान राष्ट्रीय विभूति नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ की गई एक कथित अपमानजनक टिप्पणी ने तूल पकड़ लिया। इस मामले पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बुधवार को एक आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए उन्होंने पुलिस को आदेश दिया कि नेताजी जैसी महान हस्ती के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। सरकार के इस आक्रामक और सख्त तेवर से साफ जाहिर होता है कि राष्ट्रीय अस्मिता और महापुरुषों के सम्मान के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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‘कानून सभी के लिए समान, कोई भी पद कानून से ऊपर नहीं’
मामले की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दो टूक शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया है कि देश का कानून हर नागरिक के लिए पूरी तरह बराबर है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि कानून के समक्ष न्याय करते वक्त किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
चाहे कोई व्यक्ति सत्ताधारी दल का सांसद हो, विधायक हो, किसी रसूखदार पद पर बैठा प्रशासनिक अधिकारी हो या फिर कोई आम नागरिक, यदि कोई भी व्यक्ति कानून की मर्यादा को तोड़ता है या राष्ट्रीय महापुरुषों का अपमान करता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकार की ओर से यह संदेश बेहद साफ है कि किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक या प्रशासनिक हैसियत कानून से ऊपर नहीं हो सकती।
नेताजी के अपमान पर जीरो टॉलरेंस की नीति
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे अमर स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रीय नायक के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों की गहराई से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले ऐसे महापुरुषों के सम्मान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि जो लोग भी इस तरह की अपमानजनक टिप्पाइयों के पीछे शामिल हैं, उन्हें जल्द से जल्द बेनकाब किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाए। इस आदेश के बाद दोषियों को अपनी पोस्ट डिलीट करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
सियासी गलियारों में गरमाया माहौल
शुभेंदु अधिकारी के इस सख्त और दो-ूक आदेश के बाद पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण को लेकर आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। एक तरफ जहां सरकार ने राष्ट्र नायकों के सम्मान को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ इस कार्रवाई से उन तत्वों में हड़कंप मच गया है जो सोशल मीडिया या अन्य मंचों पर इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं। प्रशासन अब इस पूरे मामले की कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
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