रांची
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. रांची में 29 जुलाई से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना अब भूख हड़ताल तक पहुंच गया है.
आंदोलन को अब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के साथ-साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का भी समर्थन मिल गया है. आइसा ने 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा मार्च का आह्वान किया है, जिसमें संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा भी शामिल होंगी.
रविवार (2 अगस्त) को राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने का पांचवां दिन था. इसी दिन छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. उसी शाम हजारों छात्रों ने मशाल जुलूस निकालते हुए अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च किया और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के खिलाफ नारे लगाए.
छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो अगले कुछ दिनों में वे झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे.
भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो बने आंदोलन का चेहरा
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन का चेहरा छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो बनकर उभरे हैं. दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बाद अब महतो ने भी अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया है.
महतो ने रविवार रात से भूख हड़ताल शुरू करते हुए कहा कि कई सप्ताह के विरोध-प्रदर्शन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए उनके पास अब यही रास्ता बचा है. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब हजारों अभ्यर्थियों के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति में पहुंच चुका है.
उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य के लिए है.
रांची: जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का स्वास्थ्य परीक्षण करते चिकित्सक. (पीटीआई/3 अगस्त, 2026)
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?
देवेंद्र नाथ महतो रांची जिले के एक गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने बुंडू से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और बाद में रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की. उनके पास संस्कृत तथा कुड़माली, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में प्रथम श्रेणी से स्नातकोत्तर डिग्रियां हैं. उन्होंने हजारीबाग से बीएड भी किया है.
वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने तमाड़ सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. वे 2015 से छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं और छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों, आरक्षण नीति तथा जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं.
क्या हैं छात्रों की मांगें?
प्रदर्शनकारी 19 अप्रैल को आयोजित 14वीं जेपीएससी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही वे पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समेत अन्य केंद्रीय एजेंसियों से भी कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए.
इसके अलावा छात्र ओएमआर शीट में ‘नॉट अटेम्प्टेड’ (प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया) का पांचवां विकल्प जोड़ने और भर्ती एजेंसियों में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं.
‘सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं रहा’
धरना स्थल पर मौजूद जेपीएससी अभ्यर्थी राहुल कुमार क्रांति ने कहा, ‘जेपीएससी में कई बार पेपर लीक हो चुके हैं. इस बार अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट लीक हुई हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन हम उससे संतुष्ट नहीं हैं.’
उन्होंने आरोप लगाया कि जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामले की पिछली जांचों का भी कोई नतीजा नहीं निकला और आशंका जताई कि मौजूदा जांच भी कुछ महीनों बाद दबा दी जाएगी.
क्रांति ने कहा, ‘मौजूदा सीआईडी जांच पर हमारा पूरी तरह से भरोसा उठ चुका है. हम पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच चाहते हैं. नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए.’
‘हम किसानों के परिवारों से आते हैं’
गिरिडीह के छात्र अंकित कुमार ने कहा, ‘दोनों आयोगों में भ्रष्टाचार की वजह से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है. हममें से अधिकांश किसान परिवारों से आते हैं. हम केवल योग्यता के आधार पर निष्पक्ष अवसर चाहते हैं.’
रांची की आदिवासी छात्रा स्नेहा ने कहा कि कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मैं 2023 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं. अगर बराबरी का और निष्पक्ष मौका ही नहीं मिलेगा तो नौकरी कैसे मिलेगी? मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हमारी मांगें सुनने की अपील करती हूं.’
पलामू की अर्चना कुमारी ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा.
लातेहार जिले के बालूमाथ के छात्र श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा, ‘सरकार अब भी नींद में है. हमें देशभर से समर्थन मिल रहा है. अलग-अलग शहरों से लोग धरना स्थल पर भोजन भेज रहे हैं. हम उन सभी लोगों के आभारी हैं, जिनकी वजह से यह आंदोलन जारी रख पाना संभव हो रहा है.’
सरकार ने हमारी बात तक नहीं सुनी’
रविवार शाम निकाले गए मशाल जुलूस में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार आंदोलन के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि उनकी समस्याएं सुनने तक नहीं आया.
छात्रों ने कहा, ‘हम लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार का कोई अधिकारी हमसे मिलने नहीं आया. इससे साफ है कि झामुमो नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार राज्य के हजारों छात्रों और युवाओं की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील है.’
सीजेपी ने दिया समर्थन
आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का भी समर्थन मिला है. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि उन्होंने रविवार रात देवेंद्र महतो और अन्य छात्र नेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की और उनके आंदोलन को समर्थन देने का भरोसा दिया.
महतो ने भी इंडिया टुडे से बातचीत में पुष्टि की कि उनकी दिपके से बात हुई है और उन्होंने इस बातचीत को सकारात्मक बताया.
आइसा ने किया विधानसभा मार्च का ऐलान
इस बीच, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी आंदोलन के समर्थन में राज्यव्यापी प्रतिवाद आयोजित किया. रांची के अल्बर्ट एक्का चौक के अलावा धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़, पलामू और राज्य के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन किए गए.
आइसा ने घोषणा की है कि 7 अगस्त को आइसा और आरवाईए के संयुक्त आह्वान पर झारखंड विधानसभा मार्च निकाला जाएगा, जिसमें दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा भी शामिल होंगी.
आइसा ने कहा कि छात्रों की मांग केवल 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द कराने तक सीमित नहीं है. संगठन ने जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल, जेपीएससी-जेट, सहायक आचार्य, माध्यमिक आचार्य, पुलिस भर्ती समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है.
संगठन का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली के लिए निजी एजेंसियों के माध्यम से परीक्षाएं कराए जाने की व्यवस्था भी जिम्मेदार है. आइसा ने मांग की कि परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी सरकार स्वयं अपने हाथ में ले, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.
आइसा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने की अपील करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है.










