तनाव और खराब नींद बन सकते हैं खतरा, जानिए मिर्गी के दौरे के 6 कारण

एपिलेप्सी, जिसे मिर्गी भी कहा जाता है, रोजमर्रा के कुछ फैक्टर्स के कारण भी ट्रिगर हो सकता है। इसलिए इन ट्रिगर्स को मैनेज करना काफी जरूरी है। इस बारे में न्यूरोलॉजी बताते हैं कि ये ट्रिगर्स हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य फैक्टर्स ऐसे हैं, जो बार-बार देखने को मिलते हैं। इन ट्रिगर्स को समझना मिर्गी के दौरों को कम करने के लिए काफी जरूरी हैं। नींद की कमी नींद की कमी एपिलेप्टिक सीजर के सबसे अहम ट्रिगर्स में से एक है। अधूरी या सोने की अनियमित आदतें दिमाग की एक्टिविटीज को अस्थिर कर सकती

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Published On :

मार्च 25, 2026

एपिलेप्सी, जिसे मिर्गी भी कहा जाता है, रोजमर्रा के कुछ फैक्टर्स के कारण भी ट्रिगर हो सकता है। इसलिए इन ट्रिगर्स को मैनेज करना काफी जरूरी है।

इस बारे में न्यूरोलॉजी बताते हैं कि ये ट्रिगर्स हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य फैक्टर्स ऐसे हैं, जो बार-बार देखने को मिलते हैं। इन ट्रिगर्स को समझना मिर्गी के दौरों को कम करने के लिए काफी जरूरी हैं।

नींद की कमी
नींद की कमी एपिलेप्टिक सीजर के सबसे अहम ट्रिगर्स में से एक है। अधूरी या सोने की अनियमित आदतें दिमाग की एक्टिविटीज को अस्थिर कर सकती है, जिससे सीजर थ्रेशोल्ड यानी दौरे सहने की क्षमता कम हो जाती है। कुछ व्यक्तियों में केवल एक रात की खराब नींद भी दौरे की संभावना को काफी हद तक बढ़ा सकती है।

मानसिक और शारीरिक तनाव
ज्यादा चिंता, अचानक भावनात्मक बदलाव या लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव दिमाग के न्यूरोकेमिकल बैलेंस को बिगाड़ सकता है। इसी तरह, ज्यादा शारीरिक थकावट भी शरीर पर वैसा ही असर डालती है, जिससे दौरे पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है।

दवाओं में अनियमितता
मिर्गी के दौरों को रोकने का सबसे असरदार तरीका दवाएं हैं, लेकिन इन्हें छोड़ना या समय पर न लेना एक बड़ा ट्रिगर बन जाता है। एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं ब्लड फ्लो में एक स्थिर स्तर बनाए रखकर काम करती हैं। अगर खुराक छूट जाती है, तो उसका असर कम हो जाता है और दौरे पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

पर्यावरणीय और विजुअल फैक्टर्स
कुछ मरीजों में चमकती रोशनी या कुछ खास विजुअल पैटर्न, जैसे- टीवी या गेमिंग स्क्रीन दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। इसे फोटोसेंसिटिविटी कहा जाता है। बिना ब्रेक के लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना इस जोखिम को और ज्यादा बढ़ा देता है।

खान-पान और लाइफस्टाइल
अक्सर लोग खान-पान से जुड़ी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये भी मिर्गी का दौरा ट्रिगर करने में अहम भूमिका निभाती हैं। खाना स्किप करना, शरीर में पानी की कमी होना, ज्यादा मात्रा में चाय-कॉफी पीना या अल्कोहल के कारण एपिलेप्टिक सीजर का खतरा बढ़ा देती हैं।

हार्मोनल बदलाव और बीमारियां
महिलाओं में हार्मोनल उतार-चढ़ाव, खासतौर से मेंसुरल साइकिल के दौरान, दौरों के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं। इसे कैटामेनियल एपिलेप्सी कहा जाता है। इसके अलावा, बुखार या किसी अन्य बीमारी के दौरान शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स भी मिर्गी ट्रिगर कर सकता है।

 

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