ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति! होर्मुज के लिए खर्ग द्वीप कब्जाने की तैयारी में ट्रंप

वॉशिंगटन ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध दिन पर दिन और भीषण रूप ले रहा है। अब दोनों तरफ से ही तेल रिफाइनरियों पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाइयों में कतर, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल में तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलों और ड्रोन बरसाए गए हैं। वहीं, ईरान दुनियाभर को तेल सप्लाई करने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए सहमत नहीं हो रहा है। इस बीच, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज खुलवाने के लिए बड़ा प्लान तैयार कर रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान को होर्मुज खोलने पर मजबूर करने

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Published On :

मार्च 20, 2026

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वॉशिंगटन
ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध दिन पर दिन और भीषण रूप ले रहा है। अब दोनों तरफ से ही तेल रिफाइनरियों पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाइयों में कतर, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल में तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलों और ड्रोन बरसाए गए हैं। वहीं, ईरान दुनियाभर को तेल सप्लाई करने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए सहमत नहीं हो रहा है। इस बीच, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज खुलवाने के लिए बड़ा प्लान तैयार कर रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान को होर्मुज खोलने पर मजबूर करने के लिए खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की रणनीति तैयार कर रहे।

कितना अहम है ईरान का खर्ग द्वीप
खर्ग द्वीप वह द्वीप है, जो ईरान का ऑयल हब यानी कि तेल का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहीं से ईरान को 90 फीसदी तेल मिलता है। यह द्वीप ईरान के दक्षिणी तट से करीब 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। पर्शियन गल्फ के बीच में होने की वजह से इसकी लोकेशन भी रणनीतिक है। हाल ही में ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर हवाई हमले भी किए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यहां पर 90 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसमें मिसाइल स्टोरेज बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे।

खर्ग पर कब्जे की रणनीति
एक्सियोस ने शुक्रवार को चार ऐसे सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी, जिन्हें इस मामले की जानकारी है, कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का दबाव बनाने के लिए, ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसकी घेराबंदी करने की योजनाओं पर विचार कर रहा है। खर्ग द्वीप पर कब्जा करने का ऑपरेशन, जो तट से 15 मील दूर स्थित है और ईरान के 90 फीसदी कच्चे तेल के निर्यात को प्रोसेस करता है, अमेरिकी सैनिकों को सीधे तौर पर हमला करने की जद में ला सकता है।

इसलिए, ऐसा कोई भी ऑपरेशन तभी शुरू किया जाएगा जब अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर कर देगी। व्हाइट हाउस की सोच की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, “हमें हमलों के जरिए ईरानियों को और कमजोर करने, द्वीप पर कब्जा करने, और फिर उन्हें पूरी तरह से अपने शिकंजे में लेकर बातचीत के लिए इस्तेमाल करने में लगभग एक महीने का समय लगेगा।”

और अधिक सैनिक भेज सकता है अमेरिका
अगर ऐसे किसी ऑपरेशन को मंजूरी मिलती है, तो उसके लिए और ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी। तीन अलग-अलग मरीन यूनिट इस क्षेत्र की ओर रवाना हो चुकी हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि व्हाइट हाउस और पेंटागन जल्द ही और भी ज्यादा सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''वह चाहते हैं कि होर्मुज खुला रहे। अगर ऐसा करने के लिए उन्हें खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा करना पड़ा, तो वह होगा। अगर वह तटीय आक्रमण करने का फ़ैसला करते हैं, तो वह भी होगा। लेकिन अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।'' उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप समेत हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में, संघर्ष वाले इलाकों में हमारे सैनिक हमेशा ज़मीन पर मौजूद रहे हैं। मुझे पता है कि मीडिया में इस बात को लेकर काफी चर्चा होती है, और मैं इसके पीछे की राजनीति भी समझता हूं, लेकिन राष्ट्रपति वही करेंगे जो सही होगा।

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