Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य पर महासंग्राम, मैक्रों ने ठुकराया ट्रंप का सैन्य साथ, नाटो पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा तेल टैंकरों की घेराबंदी के बीच पश्चिमी देशों में फूट पड़ गई है। राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप के सैन्य अभियान में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके बाद ट्रंप ने नाटो को 'बेकार' करार दिया। क्या यह मतभेद ईरान को और ताकतवर बना देगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 18, 2026

Strait of Hormuz: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा त्रिकोणीय संघर्ष अब अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। ईरान ने अपनी आक्रामकता बढ़ाते हुए इराक स्थित अमेरिकी दूतावास को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। जवाब में इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर भी ईरान की ओर से ताजा मिसाइल हमले किए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं। इन हमलों ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि राजनयिक केंद्रों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ अब ड्रोन और अत्याधुनिक मिसाइलों का खेल इस जंग को और अधिक विनाशकारी बना रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक व्यापार और अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता

इस पूरे सैन्य संकट के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर उभरा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और वह लगातार अमेरिका व उसके सहयोगी देशों के व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहा है। चूंकि दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है, इसलिए इसकी सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट से निपटने के लिए नाटो (NATO) और अन्य यूरोपीय देशों से सैन्य मदद की गुहार लगाई है, ताकि इस जलमार्ग को सुरक्षित किया जा सके।

फ्रांस का रुख: मदद को तैयार लेकिन युद्ध में शामिल होने से इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति की अपील पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मैक्रों ने मंगलवार को कहा कि फ्रांस होर्मुज को सुरक्षित बनाने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने एक बड़ी शर्त रखी है। उन्होंने साफ कर दिया कि फ्रांस का यह मिशन मध्य पूर्व में जारी वर्तमान सैन्य जंग का हिस्सा नहीं होगा। मैक्रों ने जोर देकर कहा कि वे इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, इसलिए होर्मुज को “मुक्त कराने” या “युद्धक अभियानों” में भाग लेने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में सुरक्षा बैठक से पहले स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि सैन्य बमबारी।

ट्रंप की टीम में फूट: काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट का इस्तीफा

जहाँ एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप को निराशा हाथ लग रही है, वहीं उनके घर के भीतर भी विद्रोह शुरू हो गया है। अमेरिका की काउंटर टेररिज्म चीफ ‘जो केंट’ ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। अपने इस्तीफे में केंट ने ट्रंप प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी अमेरिका के लिए सीधा खतरा नहीं था और अमेरिका को इजरायल के दबाव में इस युद्ध में घसीटा गया है। केंट के अनुसार, इस युद्ध में शामिल होना ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की नीति को एक बड़ा झटका है। यह इस्तीफा युद्ध की रणनीति को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों को उजागर करता है।

नाटो पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप: सहयोगियों से रिश्तों में आई कड़वाहट

नाटो देशों द्वारा होर्मुज में मदद करने से हाथ पीछे खींचने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने सहयोगियों के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका दूसरों की रक्षा के लिए अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत होती है, तो उसके तथाकथित साथी साथ छोड़ देते हैं। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि “हमें अब नाटो की जरूरत नहीं है।” सहयोगियों के इस व्यवहार ने नाटो गठबंधन की भविष्य की प्रासंगिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फिलहाल, बिना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अमेरिका के लिए होर्मुज को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।