Strait of Hormuz Crisis : मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत ने वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को तत्काल फिर से खोलने की जोरदार मांग की है। युद्ध शुरू होने के बाद से यह सामरिक मार्ग ईरान के कड़े नियंत्रण में है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। ब्रिटेन द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि यह जलमार्ग भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में जारी हिंसा में भारतीय मरीन और नाविकों ने अपनी जान गंवाई है, जो किसी भी देश के लिए अपूरणीय क्षति है। भारत एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जिसके नागरिकों को इस समुद्री मार्ग के विवाद में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।
कूटनीति और संवाद ही एकमात्र समाधान: विदेश सचिव विक्रम मिस्री का संदेश
लंदन में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया, जहाँ भारत ने शांति का पक्ष रखा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जोर देकर कहा कि सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और बातचीत ही इस तनावपूर्ण स्थिति को सुलझाने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। भारत का मानना है कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि यह केवल विनाश और मानवीय संकट को बढ़ाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस जलमार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए एकजुट हों ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भारत की ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा पर गहराता संकट
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए अवरोध का सीधा और नकारात्मक असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए आयात करता है। मध्य पूर्व की अस्थिरता ने न केवल कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा किया है, बल्कि समुद्री डकैती और हमलों के खतरे ने समुद्री सुरक्षा को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बात मजबूती से रखी कि ऊर्जा संसाधनों की निर्बाध आपूर्ति देश की अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अनिवार्य है और इसमें कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भारतीय नाविकों की शहादत और हॉर्मुज में फंसे जहाज
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अब तक तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो चुकी है, जो विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात थे। इसके अलावा, एक अन्य भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल है। वर्तमान में कई मालवाहक जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे चालक दल के सदस्यों और उनके परिवारों में चिंता बनी हुई है। भारत ने यूके की बैठक में इन फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने और नाविकों के लिए ‘सेफ पैसेज’ तैयार करने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की है। भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रही है।
खाड़ी देशों में रहने वाले एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के बावजूद अब तक वहां रहने वाले अधिकांश भारतीय सुरक्षित हैं और सभी भारतीय दूतावास उनके साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, इस पूरे युद्ध क्षेत्र में अब तक कुल 8 भारतीयों की जान जाने की पुष्टि हुई है और एक व्यक्ति अभी भी लापता है। लापता नागरिक की तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की मदद ली जा रही है।
सुरक्षित निकासी अभियान: अजरबैजान के सहयोग से 204 नागरिकों की वापसी
संकटग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन’ तेज कर दिया है। हाल ही में ईरान से 204 भारतीय नागरिकों को अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित रूप से निकाला गया है। विदेश मंत्रालय ने इस जटिल निकासी प्रक्रिया में सहयोग के लिए अजरबैजान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि आने वाले दिनों में और भी नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जाएगा। निकासी की योजना इस तरह बनाई गई है कि युद्ध की विभीषिका से बचाते हुए कम से कम जोखिम में लोगों को घर पहुँचाया जा सके।










