2027 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में हलचल, झुंदां गुट और ‘वारिस पंजाब दे’ साथ आए

चंडीगढ़. पंजाब की पंथक राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) में बड़ी टूट हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह झुंदां समेत 15 नेताओं ने अलग गुट बनाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने वारिस पंजाब दे के साथ गठजोड़ का एलान किया। इस घटनाक्रम को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंथक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इकबाल सिंह झुंदां ने कहा कि पंजाब और खालसा पंथ मौजूदा समय में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में मजबूत, निडर और प्रतिबद्ध नेतृत्व

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Published On :

जुलाई 21, 2026

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चंडीगढ़.

पंजाब की पंथक राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) में बड़ी टूट हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह झुंदां समेत 15 नेताओं ने अलग गुट बनाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने वारिस पंजाब दे के साथ गठजोड़ का एलान किया।

इस घटनाक्रम को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंथक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इकबाल सिंह झुंदां ने कहा कि पंजाब और खालसा पंथ मौजूदा समय में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में मजबूत, निडर और प्रतिबद्ध नेतृत्व की जरूरत है, जो पंथक हितों और पंजाब के मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठा सके।

उन्होंने दावा किया कि वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह में विभिन्न पंथक संगठनों और विचारधाराओं को एक मंच पर लाने की क्षमता है। इसी सोच के तहत उनके गुट ने वारिस पंजाब दे के साथ मिलकर आगे बढ़ने का फैसला किया है। झुंदां ने कहा कि इस गठजोड़ का उद्देश्य पंजाब और सिख समुदाय से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना, पंथक ताकतों को एकजुट करना और साझा एजेंडे के तहत काम करना है। उनका कहना था कि बिखरी हुई पंथक राजनीति को एक मंच पर लाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

शिअद (पुनर सुरजीत) के भीतर पिछले कुछ समय से पार्टी की नीतियों, संगठन की कार्यप्रणाली और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद चल रहे थे। कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पार्टी के कामकाज से असंतुष्ट बताए जा रहे थे। झुंदां गुट का आरोप है कि पार्टी अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई है और पंथक मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दे पा रही थी। इसी कारण अलग गुट बनाने का निर्णय लिया गया। इस टूट से शिअद (पुनर सुरजीत) को बड़ा झटका लगा है। 15 नेताओं के एक साथ अलग होने से पार्टी की संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है। वहीं, वारिस पंजाब दे के साथ हुए गठजोड़ ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की पंथक राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत दे दिए हैं।

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