Srinagar News: अमेरिकी और इजराइल के हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। रविवार को शिया बहुल इलाकों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और शांतिपूर्वक मार्च करते हुए अमेरिका और इजराइल विरोधी नारे लगाए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी हिंसा से दूर रहते हुए अपने विरोध को व्यक्त कर रहे थे।
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ईरानी सरकारी मीडिया ने की मौत की पुष्टि

ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार सुबह आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई शहीद हो गए हैं। ईरानी ब्रॉडकास्टर IRIB ने बताया कि खामेनेई अब नहीं रहे। इसके अलावा तस्नीम और फार्स न्यूज एजेंसी ने भी उनके शहीद होने की पुष्टि की। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से खामेनेई की मौत की घोषणा की थी। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक खामेनेई अब नहीं रहे। उनकी मौत हमारे इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से हुई।”
श्रीनगर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन
श्रीनगर के प्रदर्शन में शामिल लोग अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगा रहे थे और खामेनेई के प्रति सम्मान दिखा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने अपने मार्च में कहा कि विदेशी हमले किसी भी देश की संप्रभुता को कमजोर नहीं कर सकते। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और प्रदर्शनकारियों की निगरानी की ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। महबूबा मुफ्ती ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ईरान लंबे समय से मुस्लिम दुनिया की एक महत्वपूर्ण आवाज रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी मिसाइल या खतरे से ईरान की ताकत और उसके नागरिकों का साहस कम नहीं हो सकता। मुफ्ती ने ईरान और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए अल्लाह से दुआ की।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
खामेनेई की मौत ने कश्मीर में भी हलचल मचा दी है और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। ईरान की शहादत को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा गुस्सा और चिंता देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ेगा और इसका असर वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा।
श्रीनगर में हुए प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि ईरान की मौत का प्रत्यक्ष प्रभाव केवल उसकी सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान और भारत के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी यह गहरा असर डाल रहा है। लोग विदेशी हस्तक्षेप और सैन्य हमलों के खिलाफ एकजुट होकर अपने विरोध को व्यक्त कर रहे हैं।
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