Sri Lanka MP Pension: श्रीलंका में सांसदों की पेंशन खत्म, अब नेताओं को नहीं मिलेगी मुफ्त सुख-सुविधाएं

श्रीलंका सरकार ने देश के राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए सांसदों की पेंशन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व में संसद ने भारी बहुमत से पेंशन बिल को निरस्त किया। अब पूर्व सांसदों और उनकी पत्नियों को मिलने वाली आजीवन सुरक्षा और मुफ्त सुविधाएं इतिहास बन गई हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

Sri Lanka MP Pension:  आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने राजनेताओं के विशेषाधिकारों पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की वामपंथी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 49 साल पुराने संसदीय पेंशन अधिनियम को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। इस साहसी निर्णय के साथ ही अब श्रीलंका के वर्तमान और पूर्व सांसदों को मिलने वाली मासिक पेंशन पर स्थायी रूप से रोक लग गई है। इतना ही नहीं, यह नया नियम पूर्व सांसदों की विधवाओं को मिलने वाली सहायता पर भी लागू होगा। सरकार का मानना है कि देश की जर्जर अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सार्वजनिक धन की एक-एक बूंद को बचाना अनिवार्य है।

संसद में दो-तिहाई बहुमत से मिली मंजूरी: विपक्ष हुआ पस्त

श्रीलंका की 225 सदस्यीय संसद में राष्ट्रपति दिसानायके के सत्तारूढ़ गठबंधन का दबदबा साफ नजर आया। इस कानून को निरस्त करने के प्रस्ताव पर हुए मतदान में पक्ष में 154 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल दो सदस्यों ने हिम्मत दिखाई। न्याय मंत्री हरसाना नानायक्कारा ने इस दौरान तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि कई सांसदों के कार्य की गुणवत्ता ऐसी नहीं है कि उन्हें जीवन भर जनता के पैसे पर आश्रित रखा जाए। इस भारी बहुमत ने स्पष्ट कर दिया है कि देश अब राजनीतिक वीआईपी संस्कृति को विदा करने के लिए तैयार है।

भेदभावपूर्ण व्यवस्था का खात्मा: पांच साल बनाम दस साल का नियम

अब तक श्रीलंका में एक बेहद ही भेदभावपूर्ण कानून लागू था। जहां सामान्य सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का हकदार बनने के लिए कम से कम 10 साल की सेवा देनी पड़ती थी, वहीं सांसद महज 5 साल का एक कार्यकाल पूरा करते ही ताउम्र पेंशन के हकदार बन जाते थे। नई सरकार ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए इस असमानता को खत्म कर दिया है। अब सांसदों को किसी भी प्रकार की सेवानिवृत्ति आय नहीं दी जाएगी, जिससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ काफी कम होगा।

पूर्व राष्ट्रपतियों पर भी गिरी गाज: बंगला और सुरक्षा में कटौती

पेंशन बंद करने के साथ-साथ सरकार ने पूर्व राष्ट्रपतियों की विलासिता पर भी लगाम लगाई है। पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाले आलीशान सरकारी आवास, लग्जरी वाहन और हजारों की संख्या में तैनात बॉडीगार्ड्स की सुविधा में भारी कटौती की गई है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने सरकारी बंगला खाली करने से इनकार कर दिया था। अब पूर्व नेताओं को मिलने वाले मुफ्त ईंधन, निजी सचिवालय और सुरक्षा घेरे को न्यूनतम स्तर पर ले आया गया है।

विपक्ष का विरोध: भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका जताई

विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने सरकार के इस फैसले को “जनविरोधी” बताया है। उनका तर्क है कि सांसदों के पास भी सामाजिक सुरक्षा का अधिकार होना चाहिए। प्रेमदासा ने एक विवादास्पद चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रिटायरमेंट के बाद नेताओं के पास आय का कोई वैध स्रोत (पेंशन) नहीं होगा, तो वे अपना घर चलाने के लिए भ्रष्टाचार और गलत रास्तों को अपनाने पर मजबूर हो सकते हैं। हालांकि, जनता के बीच इस तर्क को नेताओं के डर के रूप में देखा जा रहा है।

आर्थिक सुधारों की नई दिशा: जन कल्याण पर रहेगा जोर

राष्ट्रपति दिसानायके का विजन स्पष्ट है—नेताओं की सुख-सुविधाओं में कटौती कर उस धन को जन कल्याणकारी योजनाओं में निवेश करना। श्रीलंका वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सहयोग से अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में राजनेताओं द्वारा त्याग की यह मिसाल जनता में सरकार के प्रति विश्वास पैदा कर रही है। सरकार का यह कदम दक्षिण एशिया के अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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