Sri Lanka Fuel Crisis: श्रीलंका ने लागू किया ‘फोर-डे वर्किंग वीक’, बूंद-बूंद तेल बचाने की कवायद

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण श्रीलंका में ईंधन का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इसे देखते हुए सरकार ने 18 मार्च 2026 से 'फोर-डे वर्किंग वीक' लागू कर दिया है, जिसके तहत अब हर बुधवार को स्कूल, विश्वविद्यालय और सरकारी दफ्तर पूरी तरह बंद रहेंगे।

Sri Lanka Fuel Crisis

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 17, 2026

Sri Lanka Fuel Crisis: दक्षिण एशियाई देश श्रीलंका में ईंधन की कमी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। देश में तेल की गंभीर किल्लत को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने सोमवार, 16 मार्च को घोषणा की कि अब सरकारी दफ्तर, स्कूल और विश्वविद्यालय सप्ताह में केवल चार दिन ही खुले रहेंगे। इसके तहत हर बुधवार को सरकारी संस्थान और शिक्षण संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे। यह कदम विशेष रूप से ईंधन की बचत और आपूर्ति प्रबंधन के लिए उठाया गया है।

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सरकारी और निजी क्षेत्र में बदलाव

Sri Lanka Fuel Crisis
श्रीलंका ने लागू किया ‘फोर-डे वर्किंग वीक’

श्रीलंका की सरकार ने इस निर्णय को केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रखा। प्राइवेट सेक्टर से भी अपील की गई है कि वे ऊर्जा की बचत के लिए अपने कार्य सप्ताह में कटौती करें या वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाओं को लागू करें। हालांकि, आवश्यक सेवाओं को इस योजना से बाहर रखा गया है। इनमें स्वास्थ्य सेवाएं, बंदरगाह संचालन, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क जैसे विभाग शामिल हैं, ताकि देश की बुनियादी व्यवस्था प्रभावित न हो।

ईंधन वितरण पर सख्त नियम

सरकार ने केवल छुट्टियों के दिन बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रखा। ईंधन के वितरण पर भी नियंत्रण लगाया गया है। अब देश में डिजिटल राशनिंग प्रणाली लागू की गई है। इसमें वाहनों के प्रकार—दोपहिया, तिपहिया या कार—के आधार पर साप्ताहिक ईंधन कोटा तय किया गया है। उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए फ्यूल स्टेशनों पर QR कोड दिखाना होगा। इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी और सीमित स्टॉक का समान वितरण सुनिश्चित होगा।

संकट की वजह

श्रीलंका पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर असर के कारण देश के पास सीमित ईंधन भंडार बचा है। तेल की कमी के चलते सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कार्य सप्ताह में कटौती करने से करोड़ों लीटर ईंधन की बचत होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ठप होने से बचाया जा सकेगा।

जनता और व्यवस्था पर असर

इस योजना के लागू होने से आम नागरिकों और संस्थानों की दिनचर्या पर असर पड़ने की संभावना है। सरकारी कर्मचारियों और छात्रों को अब सप्ताह में चार दिन ही दफ्तर और स्कूल आना होगा। वहीं, निजी कंपनियों को भी अपने कार्य सप्ताह को संकुचित करने या वर्क फ्रॉम होम विकल्प अपनाने के लिए कहा गया है।

सरकार का लक्ष्य है कि सीमित संसाधनों के बावजूद देश की आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों और ईंधन का समान और प्रभावी वितरण सुनिश्चित किया जा सके। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल ईंधन बचाया जाएगा, बल्कि आर्थिक संकट के बीच देश की उत्पादन और सेवाओं में निरंतरता भी बनी रहेगी।

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