
Sonia Gandhi Statement: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने अपनी आगामी किताब को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब 1984 में राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बन रहे थे, तब वह इस निर्णय के पूरी तरह खिलाफ थीं और कभी नहीं चाहती थीं कि उनके पति यह जिम्मेदारी संभालें।
सोनिया गांधी की यह नई किताब ‘बिलॉन्गिंग – ए जर्नी ऑफ लव’ (Belonging – A Journey of Love) आगामी 10 नवंबर को लॉन्च होने जा रही है। इस किताब में उन्होंने अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं और महत्वपूर्ण पड़ावों को साझा किया है।
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सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर दी किताब की जानकारी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर हाल ही में अपना नया अकाउंट बनाने के बाद सोनिया गांधी ने मंगलवार (27 अक्टूबर, 2026) को एक वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो पोस्ट में उन्होंने अपनी नई किताब का जिक्र किया और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के दौर से जुड़ी अपनी निजी असहमति का खुलासा किया।
वीडियो पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा “जब यह किताब आएगी, तो थोड़ा तमाशा (विवाद) होना तो तय है। आखिरकार, दशकों तक दूसरों ने मेरी कहानी सुनाई है— अब मेरी बारी है।”

“दूसरों ने गलत तथ्य लिखे, अब सच बताने की बारी मेरी है”
जारी किए गए वीडियो में सोनिया गांधी से एक सवाल पूछा गया कि दशकों तक दूसरों द्वारा उनके जीवन पर लिखे जाने के बाद, अपनी कहानी खुद लिखने का अनुभव कैसा रहा?
इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश: “मुझे नहीं पता कि मुझे पूरी कहानी बतानी चाहिए या नहीं, लेकिन मुझे लगा कि मेरे बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है, जिनमें से कई बातें सही नहीं थीं। कई किस्से या तो मनगढ़ंत थे या फिर उन्हें काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।” उन्होंने कहा कि इन्हीं वजहों से उन्हें महसूस हुआ कि अब समय आ गया है जब वह अपनी कहानी खुद लिखें और घटनाओं को उसी रूप में दर्ज करें, जैसी वे असलियत में घटी थीं।
“यह मेरा वर्जन नहीं, मेरी खुद की कहानी है”

सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि वह इस किताब को किसी के बयान के जवाब या ‘वर्जन’ के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि यह उनकी अपनी वास्तविक जीवन यात्रा है। उन्होंने कहा, “लोग अपने-अपने विचार रखते हैं। इस किताब को पढ़कर हो सकता है कि कुछ लोग मेरे प्रति अपनी राय बदल लें, जबकि कुछ लोगों की नजर में मेरी छवि पहले से और खराब हो सकती है। लेकिन सार्वजनिक जीवन में ऐसा होना स्वाभाविक है।” उन्होंने दोहराया कि जब आप कोई किताब सार्वजनिक करते हैं, तो चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं होना तय है। लंबे समय तक दुनिया ने दूसरों के नजरिए से उनकी जिंदगी को देखा है, लेकिन अब वह खुद अपनी जुबानी अपना सच रख रही हैं।
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