Sonia Gandhi Voter List Row : कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें एक पुराने चुनावी मामले को लेकर बढ़ती नजर आ रही हैं। मतदाता सूची में कथित रूप से गलत तरीके से नाम शामिल कराए जाने के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर शनिवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनिया गांधी के कानूनी दल को सख्त निर्देश दिए हैं। जज ने बचाव पक्ष के वकील को आदेश दिया है कि वे याचिका में लगाए गए आरोपों पर एक सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें। इस अदालती निर्देश के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी दांव-पेच और तेज होने की उम्मीद है।
याचिकाकर्ता की दलीलें और चुनाव आयोग की रिपोर्ट का जिक्र
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के पक्ष ने अपनी सभी मुख्य दलीलें अदालत के समक्ष रख दी हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की एक विशिष्ट रिपोर्ट को साक्ष्य के तौर पर पेश करने की अनुमति भी मांगी है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे अपने मुवक्किल के निर्दोष होने के समर्थन में कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और ठोस सबूत पेश करना चाहते हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने इस कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख निर्धारित की है, जहाँ बचाव पक्ष की दलीलों पर विस्तार से चर्चा होगी।
विवाद की जड़: नागरिकता बनाम मतदाता सूची का समय
इस पूरे विवाद का मुख्य आधार सोनिया गांधी की भारतीय नागरिकता और उनके मतदाता पंजीकरण के समय के बीच का अंतर है। याचिकाकर्ता का गंभीर आरोप है कि सोनिया गांधी ने भारत की नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही, कानून का उल्लंघन करते हुए अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा लिया था। पिछली सुनवाई जो 30 मार्च को हुई थी, उसमें अदालत ने मामले के कुछ पहलुओं पर गौर किया था और बचाव पक्ष को अपनी बात रखने के लिए 18 अप्रैल का समय दिया था। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
वकील विकास त्रिपाठी की याचिका और दर्ज मामले की मांग
यह आपराधिक पुनरीक्षण याचिका वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है। उनकी स्पष्ट मांग है कि नियमों के कथित उल्लंघन और दस्तावेजों के साथ हेराफेरी के लिए सोनिया गांधी के खिलाफ औपचारिक रूप से आपराधिक केस दर्ज किया जाए। त्रिपाठी का तर्क है कि एक विदेशी नागरिक का नाम भारतीय मतदाता सूची में शामिल होना न केवल चुनावी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक प्रावधानों के साथ भी खिलवाड़ है। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रभावशाली राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
1980 से 1983 के बीच का रहस्यमयी पंजीकरण घटनाक्रम
याचिका में प्रस्तुत किए गए कालक्रम (Timeline) के अनुसार, सोनिया गांधी को आधिकारिक तौर पर 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त हुई थी। हालांकि, दस्तावेजी दावों के अनुसार, उनका नाम 1980 की मतदाता सूची में पहले से ही दर्ज था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1980 में नाम जुड़ने के बाद इसे 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में नागरिकता मिलने पर दोबारा जोड़ा गया। सवाल यह उठाया गया है कि बिना नागरिकता के 1980 में उनका नाम सूची में कैसे आया? याचिकाकर्ता ने इसे उस दौर के ‘राजनीतिक प्रभाव’ और ‘फर्जीवाड़े’ का परिणाम बताया है, जिसकी गहन जांच की मांग की जा रही है।
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