Sonam Wangchuk: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के इस आंदोलन में पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देश के जाने-माने शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति बुधवार (8 जुलाई 2026) को और ज्यादा बिगड़ गई है। डॉक्टरों द्वारा जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, अनशन के कारण उनके शरीर का वजन तेजी से गिरा है, जिससे उनकी सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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बुधवार सुबह जारी हुआ ताजा हेल्थ बुलेटिन
बुधवार सुबह डॉक्टरों की टीम ने सोनम वांगचुक की जांच के बाद आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन (Health Bulletin) जारी किया। मेडिकल रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं,
वजन में भारी गिरावट: भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से अब तक वांगचुक का वजन 7 किलोग्राम से ज्यादा कम हो चुका है। वर्तमान में उनका वजन घटकर 59.40 किलोग्राम पर आ गया है।
रक्तचाप (Blood Pressure): बैठने की स्थिति में उनका बीपी 103/68 और लेटने की स्थिति में 111/73 दर्ज किया गया है।
पल्स और ऑक्सीजन: उनकी दिल की धड़कन (हार्ट रेट) 74 प्रति मिनट है, जबकि ऑक्सीजन सैचुरेशन 98 प्रतिशत के साथ सामान्य बना हुआ है।
ब्लड शुगर: शरीर में रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर 75 रिकॉर्ड किया गया है।
राहत की बात यह है कि डॉक्टरों के मुताबिक उनके शरीर में अभी पानी का स्तर (हाइड्रेशन) ठीक है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क व सक्रिय हैं।
क्या हैं आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें?
जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन पिछले 19 दिनों से लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी छात्र और संगठन देश में बार-बार हो रही परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर बेहद आक्रोशित हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन की मुख्य मांगों को रेखांकित करते हुए कहा, बार-बार होने वाले पेपर लीक के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
मुआवजे की मांग: पेपर लीक और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को सरकार की तरफ से 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता (मुआवजा) दी जाए।
जवाबदेही तय हो: देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाकर सरकार छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे।
सोशल मीडिया पर मिली बड़ी कानूनी जीत
इस आंदोलन के बीच सीजेपी संगठन के लिए मंगलवार को अदालत से एक राहत भरी खबर आई। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने संगठन के मूल ‘एक्स’ (ट्विटर) हैंडल पर लगी रोक को हटाने का आदेश दिया है। सीजेपी ने इस फैसले का स्वागत किया है। संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की एक बड़ी नैतिक और कानूनी जीत बताया है, जिससे छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिशें नाकाम हुई हैं।
अन्य छात्र संगठनों का भी अनशन जारी
सोनम वांगचुक के साथ-साथ जंतर-मंतर पर अन्य छात्र संगठन भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्य भी प्रदर्शन स्थल पर एक अलग मंच बनाकर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। इनमें प्रमुख रूप से छात्र नेता नेहा, मनीष, ऋषिकेश, दीपक कुमार वर्मा और आमीन शामिल हैं, जो परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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