Sonam Wangchuk Protest: सुप्रिया सुले ने की मुलाकात, संसद में लड़ाई लड़ने का भरोसा

सोनम वांगचुक के आंदोलन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले ने उनसे मुलाकात की और संसद में मुद्दा उठाने का भरोसा दिया। इस मुलाकात के बाद लद्दाख से जुड़े मांगों और आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आखिर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, जानिए पूरी जानकारी।

Sonam Wangchuk Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 17, 2026

Sonam Wangchuk Protest:  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की वरिष्ठ सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रख्यात वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। सोनम वांगचुक इन दिनों विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जो लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। सुप्रिया सुले ने वहां मौजूद होकर न केवल वांगचुक के प्रति अपना नैतिक समर्थन व्यक्त किया, बल्कि उनसे एक भावुक अपील भी की। सुले ने वांगचुक से आग्रह किया कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए इस कठिन अनशन को तत्काल समाप्त करें। यह मुलाकात राजनीतिक और सामाजिक हलकों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता को दर्शाती है।

संसद में गूंजेगा मुद्दा: सुप्रिया सुले ने दिया आश्वासन

सुप्रिया सुले ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक की लड़ाई केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि यह देश के व्यापक मुद्दों से जुड़ी है। उन्होंने विश्वास दिलाते हुए कहा कि वे और पूरा विपक्ष इन मांगों को आगामी संसद सत्र में पूरी मजबूती के साथ उठाएंगे। सुले ने एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए कहा, “अगर कोई लड़ाई लड़नी है, तो हम संसद के भीतर भी लड़ेंगे।” उन्होंने बताया कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद सत्र में वे इन मांगों के साथ-साथ नीट (NEET) छात्रों की चिंताओं को भी प्रमुखता से रखेंगी। विपक्षी सांसद का यह आश्वासन वांगचुक के आंदोलन को एक नई राजनीतिक दिशा और संबल प्रदान करने वाला है।

विपक्षी दलों का व्यापक समर्थन और एक भावुक अपील

सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। सुप्रिया सुले ने जानकारी दी कि डिंपल यादव सहित कई अन्य दलों के नेता भी वांगचुक से मिलने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि डीएमके (DMK) और टीएमसी (TMC) जैसी पार्टियों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। सुले ने कहा कि पूरा विपक्ष 20 तारीख को उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ा रहेगा। एक भावुक अपील करते हुए सुप्रिया सुले ने एक बहन की भूमिका में हाथ जोड़कर विनती की कि “देश को आपकी जरूरत है, कृपया आप हमारे कहने पर अन्न ग्रहण कर लें।” उनका यह विनम्र आग्रह वांगचुक के प्रति विपक्ष के सम्मान और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता को उजागर करता है।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और संवाद का महत्व

सोनम वांगचुक का यह अनशन देश के विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों को केंद्र में लाने का एक प्रयास है। सुप्रिया सुले का जंतर-मंतर पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के अधिकार को विपक्ष पूरी तरह से सुरक्षित रखना चाहता है। यह घटनाक्रम सरकार पर इन मुद्दों के समाधान के लिए दबाव डालने का भी कार्य कर रहा है। सुले की सक्रियता और विपक्ष का यह सामूहिक प्रयास यह सुनिश्चित करने की दिशा में है कि वांगचुक की मांगों को संसद के पटल पर गंभीरता से सुना जाए और उन पर सार्थक चर्चा हो सके। आने वाले दिनों में संसद सत्र के दौरान इन मुद्दों पर सरकार का रुख क्या होगा, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।

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