Sonam Wangchuk Letter: नीट (NEET) परीक्षा धांधली और पेपर लीक के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे लद्दाख के विख्यात पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अस्पताल के बिस्तर से केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के एवज में प्रशासनिक व्यवस्था के समक्ष तीन बड़ी और कड़े शर्तें रखी हैं। इस आधिकारिक पत्र में उन्होंने खुलासा किया है कि बीती रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी। इस शिष्टाचार मुलाकात के लिए दोनों शीर्ष नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि वे देश के युवाओं के भविष्य की कीमत पर अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
केंद्रीय मंत्रियों संग सकारात्मक वार्ता का ब्योरा
अस्पताल से प्रेषित अपनी चिट्ठी में सोनम वांगचुक ने बीती रात मंत्रियों के साथ हुई बंद कमरे की रणनीतिक चर्चा का विस्तृत विवरण साझा किया है। उन्होंने पत्र में लिखा, “माननीय मंत्रियों के साथ हुई गंभीर चर्चा के दौरान मुझे यह ठोस आश्वासन दिया गया था कि सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। इसमें देश भर में प्रश्नपत्र लीक (Paper Leak) होने के सदमे से आत्महत्या करने वाले निर्दोष छात्रों के पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मुआवजा (Compensation) देना शामिल है।” वांगचुक ने जोर देकर कहा कि सरकार को इस अकादमिक संकट से तबाह हुए परिवारों की जिम्मेदारी लेनी ही होगी।
संसद में जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार की मांग
सोनम वांगचुक ने देश की गिरती परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक लचरता को लेकर जवाबदेही तय करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने मंत्रियों को दिए गए मांग पत्र में स्पष्ट लिखा है कि इस पूरे राष्ट्रीय संकट पर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद के भीतर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत और सार्थक चर्चा कराई जाए। इसके साथ ही, वांगचुक ने वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफे पर सरकार द्वारा गंभीरता से विचार किए जाने की शर्त को भी अपने पत्र में प्रमुखता से रेखांकित किया है, ताकि भविष्य में ऐसी धांधली की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिसिया ज्यादतियों के बीच भी शांतिपूर्ण रहा ‘पार्लियामेंट मार्च’
बीते दिनों राजधानी दिल्ली की सड़कों पर हुए जबरदस्त बवाल और छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए वांगचुक ने सुरक्षा बलों के रवैये पर उंगली उठाई है। उन्होंने पत्र में लिखा, “सुरक्षा एजेंसियों की अत्यधिक ज्यादतियों, लाठीचार्ज और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किए जाने के बावजूद 20 जुलाई का ‘चलो संसद मार्च’ पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण रहा। देश और पूरी दुनिया ने भारतीय युवाओं के लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अद्भुत धैर्य और संकल्प को लाइव देखा है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि शांतिपूर्ण मार्च में शामिल देशभक्त युवाओं के खिलाफ बदले की भावना से कोई दमनकारी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
65 सांसदों की अनशन खत्म करने की भावुक अपील
अपनी सेहत और भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए सोनम वांगचुक ने बताया कि जेपी नड्डा के आगमन के बाद, देश के अलग-अलग राजनैतिक दलों के लगभग 65 सांसदों (MPs) ने उन्हें पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपना अनशन समाप्त करने का विनम्र अनुरोध किया है। वांगचुक ने कहा, “तमाम सांसदों ने मुझे याद दिलाया कि देश सेवा और शैक्षणिक सुधारों के क्षेत्र में मुझे अभी बहुत से ऐतिहासिक काम करने हैं। मैं उनकी इस तार्किक बात से पूरी तरह सहमत हूँ। मैं भी सम्मान के साथ जीना चाहता हूँ और अपने प्रिय छात्रों, अपनी प्रयोगशाला और उस रचनात्मक कार्य की ओर वापस लौटना चाहता हूँ जिसने मेरे इस जीवन को एक सार्थक अर्थ दिया है।”
सुरक्षित शैक्षणिक तंत्र की मांग करने वालों को कानूनी संरक्षण की गुहार
पत्र के अंतिम और सबसे संवेदनशील हिस्से में सोनम वांगचुक ने आंदोलन में शामिल हुए हजारों छात्र-छात्राओं के लिए एक सुरक्षा कवच की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार से लिखित में यह आश्वस्त करने की पुरजोर अपील की है कि इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी या छात्र नेता के खिलाफ भविष्य में कोई भी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई (Legal Action) या उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। वांगचुक ने भावुक लहजे में कहा कि इन बच्चों का एकमात्र गुनाह यह है कि इन्होंने देश में एक पारदर्शी और जवाबदेह एजुकेशन सिस्टम के निर्माण के लिए अपनी आवाज बुलंद की थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का भरोसा देती है, तो वे तुरंत अपना अनशन समाप्त कर देंगे।










