Sonam Wangchuk Hunger Strike: पर्यावरण कार्यकर्ता और प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अनशन अब बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को उनकी भूख हड़ताल का 20वां दिन है। लगातार तीन सप्ताह से चल रहे इस उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति अत्यधिक चिंताजनक बनी हुई है। उनके साथ समर्थन में खड़े लोगों और डॉक्टरों की टीम ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
शरीर की हड्डियां दिखाई देने लगीं, लड़खड़ाते हैं कदम
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अभिजीत दीपके ने वांगचुक की स्थिति पर भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि वांगचुक का शरीर अब जवाब देने लगा है और उनकी कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि हड्डियां साफ दिखाई देने लगी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें मंच से उतरते समय साथियों का सहारा लेते देखा जा सकता है, जहाँ उनके कदम लड़खड़ा रहे हैं। गुरुवार को वे दो बार गिरते-गिरते बचे, जो उनकी गंभीर शारीरिक स्थिति का प्रमाण है।
ऑर्गन फेलियर का खतरा
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि 20 दिनों तक अन्न-जल का त्याग करने से वांगचुक का शरीर ‘क्रिटिकल’ अवस्था में पहुंच चुका है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उपवास जारी रहा और तुरंत कोई समाधान नहीं निकला, तो उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के काम करना बंद करने (ऑर्गन फेलियर) की प्रबल संभावना है। इसके बावजूद, सोनम वांगचुक का संकल्प अडिग है। उन्होंने घोषणा की है कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलता, वे अपना अनशन खत्म करने वाले नहीं हैं। उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई को होने वाले ‘संसद मार्च’ को सफल बनाने का आह्वान किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मामले में संज्ञान लिया है। हाल ही में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी की जाए। इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि यदि स्थिति और अधिक बिगड़ती है, तो उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
अनशन का उद्देश्य और भविष्य
वांगचुक लद्दाख की अस्मिता, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा की मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं। उनके इस संघर्ष ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। हालांकि, उनकी जान पर बन आए खतरे को देखते हुए अब हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई सार्थक संवाद स्थापित हो सके। वांगचुक का यह 20 दिनों का लंबा संघर्ष एक तरफ उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ उनकी घटती ऊर्जा देश के नीति-निर्धारकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर समर्थकों की भीड़ बढ़ती जा रही है और हर किसी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।










