Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारों और परीक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके साथियों से मिलने के लिए शुक्रवार को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान खेड़ा ने वांगचुक और उनके साथ बैठे प्रदर्शनकारियों से भावुक अपील की कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए इस आंदोलन को वापस लें और अपनी जान जोखिम में न डालें।
पवन खेड़ा की सलाह
बताते चले कि, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मौजूदा सरकार लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार के प्रति पूरी तरह से उदासीन है। उन्होंने वांगचुक से आग्रह किया कि वे अपना अनशन खत्म करें क्योंकि ऐसी सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद करना व्यर्थ है जो जन आंदोलनों के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है। खेड़ा ने एक्स पर अपनी बात साझा करते हुए जोर दिया कि नागरिकों की मांगों को नजरअंदाज करना ‘राजधर्म’ के विरुद्ध है।
सरकार पर कटाक्ष
पवन खेड़ा ने इंदिरा गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें असहमति के बावजूद संवाद में विश्वास रखती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा सुधारों की मांग पर सरकार का संवाद करने से इनकार करना केवल अहंकार ही नहीं, बल्कि भारी संवेदनहीनता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बेहद खतरनाक है।
‘जीवित रहने का महत्व’
कांग्रेस नेता ने सोनम वांगचुक से स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी आंदोलन अपने लोगों को खोकर मजबूत नहीं होता। उन्होंने कहा कि संघर्ष जारी रखने के लिए जिंदा रहना आवश्यक है, इसलिए उन्हें स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी की ओर से भी उन्होंने इस मुद्दे पर पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और प्रदर्शनकारियों से स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की गुहार लगाई।
अरविंद केजरीवाल का समर्थन
इससे पूर्व, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। केजरीवाल ने कहा कि वांगचुक केवल अपने लिए नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाला छात्र केवल परीक्षा नहीं देता, बल्कि अपने सपनों की आधारशिला रखता है।
पेपर लीक का संकट
केजरीवाल ने पेपर लीक की घटनाओं को युवाओं के भरोसे पर गहरी चोट बताया। उन्होंने खुद को एक आईआईटीयन बताते हुए कहा कि पूर्व में ऐसी स्थितियां देखने को नहीं मिलती थीं। वर्तमान में बार-बार हो रहे पेपर लीक ने छात्रों का मनोबल तोड़ दिया है और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस व्यवस्था में तत्काल और ठोस सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।










