Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक के समर्थन में विपक्ष एकजुट, सरकार पर बढ़ा दबाव

सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। गिरती सेहत के बावजूद वे 20 जुलाई के संसद मार्च तक लड़ाई जारी रखने के अपने संकल्प पर अडिग हैं। अरविंद केजरीवाल सहित तमाम विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पहुँचकर उनका समर्थन किया है और सरकार से शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की है।

Sonam Wangchuk Hunger Strike

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 17, 2026

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा शिक्षा सुधारों और युवाओं के भविष्य को लेकर की जा रही 20 दिवसीय भूख हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस आंदोलन को अब व्यापक राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता न केवल इस विरोध प्रदर्शन के प्रति एकजुटता दिखा रहे हैं, बल्कि वांगचुक की गिरती सेहत पर गहरी चिंता जताते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील भी कर रहे हैं।

कांग्रेस का बड़ा दावा

बताते चले कि, सोनम वांगचुक के आंदोलन को कांग्रेस का मजबूत समर्थन प्राप्त है। सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी ने व्यक्तिगत रूप से वांगचुक से अनशन खत्म करने का आग्रह किया है। पार्टी ने इस दौरान 1984 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम को याद किया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लद्दाखियों के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की खातिर अनशन कर रहे वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल को मनाने के लिए लेह की यात्रा की थी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और कर्नाटक के मंत्री दिनेश गुंडू राव ने भी विरोध स्थल पर पहुंचकर वांगचुक के संकल्प की सराहना की और इसे देश के लिए महत्वपूर्ण बताया।

‘शिक्षा मंत्री के रूप में वांगचुक को देखना चाहते हैं अरविंद केजरीवाल’

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पहुंचकर सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने युवाओं के भविष्य के लिए वांगचुक के संघर्ष की प्रशंसा करते हुए एक बड़ा सुझाव दिया। केजरीवाल ने मांग की कि मौजूदा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया जाए। वहीं, आप नेता सौरभ भारद्वाज ने भी इसी मांग को दोहराते हुए कहा कि सरकार को वांगचुक जैसे समर्पित व्यक्ति की बातों को गंभीरता से सुनना चाहिए।

समाजवादी पार्टी का मोर्चा

समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे पर पूरी तरह वांगचुक के साथ खड़ी है। सपा सांसद और वरिष्ठ नेता डिंपल यादव ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे ‘संवेदनहीनता’ करार दिया। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से आग्रह किया है कि वे अहंकार छोड़कर धरना स्थल पर आएं और प्रदर्शनकारियों के साथ सार्थक बातचीत शुरू करें। सपा ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार का उदासीन रवैया कतई स्वीकार्य नहीं है।

दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले में हस्तक्षेप किया। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वांगचुक की स्थिति की निरंतर क्लिनिकल निगरानी की जाए। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘जीवन अनमोल है’, इसलिए उनकी जान बचाने के लिए हर संभव चिकित्सकीय प्रयास किए जाएं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर पूरी तरह नजर रखे हुए है।