Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की हालत पर चिंता गहराई, अनशन को लेकर हाई कोर्ट में याचिका

लंबे समय से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। याचिका में दावा किया गया है कि उनका वजन 8.5 किलो घट चुका है और स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

Sonam Wangchuk Hunger Strike

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 15, 2026

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक मामले और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात शिक्षाविद और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। उनकी तेजी से गिरती सेहत को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक आपातकालीन जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि वांगचुक का अनशन जबरन खत्म करवाकर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और मेडिकल सहायता के जरिए खाना खिलाया जाए, क्योंकि उनका वजन 8.5 किलोग्राम तक गिर चुका है और डॉक्टरों के मुताबिक अगले दो दिनों के भीतर उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।

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हाई कोर्ट में दायर याचिका

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य संकेतकों (Health Indicators) का हवाला देते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को उचित निर्देश जारी करने की मांग की है।

याचिका की मुख्य दलील: याचिका में कहा गया है कि यदि सोनम वांगचुक को तुरंत चिकित्सा संरक्षण में नहीं लिया गया और उनकी भूख हड़ताल ऐसे ही आगे जारी रही, तो अगले 48 घंटों में उनके अंगों के काम बंद करने (Organ Failure) या मौत होने की प्रबल आशंका है। याचिकाकर्ता ने भावुक अपील करते हुए कहा कि इतने बड़े वैश्विक स्तर के शिक्षाविद और सुधारक की इस तरह जान जाना पूरे देश और दुनिया के लिए बेहद शर्मनाक बात होगी।

खतरनाक स्तर पर पहुंचा ब्लड शुगर और बीपी

आंदोलन के आयोजकों और जंतर-मंतर पर तैनात डॉक्टरों की टीम द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, 18वें दिन में प्रवेश कर चुके इस अनशन ने वांगचुक के शरीर को बेहद कमजोर कर दिया है।

चिकित्सकीय आंकड़ों के मुताबिक

वजन में भारी गिरावट: अनशन के दौरान सोनम वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम कम हो गया है।

ब्लड प्रेशर (BP): उनका रक्तचाप घटकर 107/70 mmHg रह गया है, जो सामान्य से काफी कम है।

ब्लड शुगर लेवल: उनके रक्त में शर्करा का स्तर खतरनाक रूप से गिरकर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) पर पहुंच चुका है।

‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि वांगचुक की शारीरिक स्थिति इतनी नाजुक है कि उन्हें खड़े होने या बैठने की कोशिश करने पर भी तेज चक्कर आ रहे हैं। यहां तक कि उन्हें वॉशरूम जाने के लिए भी दूसरों के सहारे की जरूरत पड़ रही है और वे अत्यधिक शारीरिक दर्द से गुजर रहे हैं।

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सोनम वांगचुक का यह आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था में फैले कथित भ्रष्टाचार और हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक कांड के विरोध में शुरू हुआ था। वांगचुक और उनके समर्थक इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।

फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेष टीम प्रदर्शन स्थल पर सफेद गद्दे पर लेटे वांगचुक की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। सीजेपी के प्रतिनिधि दीपके ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वे प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बिना देरी किए गंभीरता से विचार करें क्योंकि यहां एक महान देशभक्त की जान दांव पर लगी है। इस बीच, आंदोलनकारियों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए 20 जुलाई को संसद भवन तक विशाल पदयात्रा (संसद मार्च) निकालने का भी ऐलान किया है। अब हर किसी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं कि कोर्ट इस जीवन-मरण के संकट पर क्या रुख अपनाता है।

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