Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया के बाद अब फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन

क्या दुनिया भर में अब बच्चों के लिए सोशल मीडिया का अंत होने वाला है? ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब फ्रांस ने भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी कर ली है। आखिर क्यों राष्ट्रपति मैक्रों इसे 'डिजिटल जहर' कह रहे हैं? जानें पूरी रिपोर्ट।

Social Media Ban

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 1, 2026

Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया द्वारा उठाए गए सख्त कदमों का अनुसरण करते हुए अब फ्रांस ने भी अपनी आने वाली पीढ़ी को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए कमर कस ली है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने एक क्रांतिकारी मसौदा कानून पेश किया है, जिसके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कानून 1 सितंबर 2026 से पूरे फ्रांस में प्रभावी हो जाएगा। इस तारीख के बाद किसी भी नाबालिग के लिए सोशल मीडिया अकाउंट रखना या उसे एक्सेस करना गैरकानूनी माना जाएगा। फ्रांस सरकार का यह फैसला वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करने वाला है।

Social Media Ban: मानसिक स्वास्थ्य का संकट: UNESCO की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

फ्रांस सरकार ने यह कठोर निर्णय केवल प्रशासनिक आधार पर नहीं, बल्कि गंभीर वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक शोधों के बाद लिया है। UNESCO की एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यूरोप में लगभग 40% किशोर रोजाना 3 घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। अत्यधिक ‘स्क्रीन टाइम’ के कारण बच्चों में चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression) और नींद संबंधी गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं। राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बच्चों को ‘डिजिटल स्क्रीन के जहर’ से बचाना अब उनके प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम बच्चों के कोमल मस्तिष्क को प्रभावित कर उन्हें वास्तविकता से दूर ले जा रहे हैं।

Social Media Ban: टेक कंपनियों पर नकेल और भारी जुर्माने का प्रावधान

नए कानून के तहत जिम्मेदारी केवल माता-पिता या बच्चों की नहीं होगी, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी जवाबदेह बनाया जाएगा। यदि कोई टेक कंपनी 15 साल से कम उम्र के नाबालिगों को अपनी सेवाएं प्रदान करती है या आयु सत्यापन (Age Verification) में लापरवाही बरतती है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर करोड़ों यूरो का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। फ्रांस में पहले से ही 3 साल तक के बच्चों के लिए टैबलेट के उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन यह नया कानून डिजिटल जगत पर लगाम लगाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है।

स्कूलों में पूर्ण प्रतिबंध और ‘डिजिटल कर्फ्यू’ की तैयारी

फ्रांस सरकार ने स्कूलों के माहौल को पूरी तरह ‘डिजिटल फ्री’ बनाने के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में फ्रांस के केवल प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में ही फोन प्रतिबंधित थे, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर हाई स्कूलों (15-18 वर्ष) में भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, सरकार एक और चौंकाने वाले प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसे ‘डिजिटल कर्फ्यू’ कहा जा रहा है। इसके तहत 15 से 18 साल के किशोरों के लिए रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक इंटरनेट या सोशल मीडिया के उपयोग पर पाबंदी लगाई जा सकती है, ताकि उनकी नींद और मानसिक एकाग्रता प्रभावित न हो।

वैश्विक परिदृश्य: ऑस्ट्रेलिया के नक्शेकदम पर फ्रांस

फ्रांस ऐसा करने वाला दुनिया का दूसरा प्रमुख देश बन गया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुनिया का पहला सोशल मीडिया बैन कानून पारित कर वैश्विक स्तर पर चर्चा छेड़ दी थी। ऑस्ट्रेलिया में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक और अन्य उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। अब फ्रांस द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि यूरोपीय संघ (EU) के अन्य देश भी जल्द ही अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कानून ला सकते हैं।

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