छह साल की महक-अनन्या हरिद्वार से मेरठ तक लाई 11 लीटर जल

मेरठ।  कंधे नन्हे हैं, लेकिन हौसला किसी बड़े कांवड़िये से कम नहीं। उम्र महज छह साल और संकल्प मम्मी-पापा की लंबी उम्र का। इसी संकल्प के साथ मेरठ की सगी बहनें महक और अनन्या हरिद्वार से 11 लीटर जल वाली कांवड़ उठाकर एक सप्ताह से पैदल चल रही थीं। सोमवार को दोनों बहनें कांवड़ लेकर मेरठ पहुंचीं तो रास्ते में जिसने भी उन्हें देखा, उनकी आस्था और हौसले को प्रणाम किए बिना नहीं रह सका। मंगलवार को उन्होंने अपनी मम्मी और पापा की लंबी उम्र के लिए जलाभिषेक किया।  महक और अनन्या ने बताया कि उन्होंने बाबा भोलेनाथ से अपने

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अगस्त 11, 2026

मेरठ। 

कंधे नन्हे हैं, लेकिन हौसला किसी बड़े कांवड़िये से कम नहीं। उम्र महज छह साल और संकल्प मम्मी-पापा की लंबी उम्र का। इसी संकल्प के साथ मेरठ की सगी बहनें महक और अनन्या हरिद्वार से 11 लीटर जल वाली कांवड़ उठाकर एक सप्ताह से पैदल चल रही थीं। सोमवार को दोनों बहनें कांवड़ लेकर मेरठ पहुंचीं तो रास्ते में जिसने भी उन्हें देखा, उनकी आस्था और हौसले को प्रणाम किए बिना नहीं रह सका। मंगलवार को उन्होंने अपनी मम्मी और पापा की लंबी उम्र के लिए जलाभिषेक किया। 

महक और अनन्या ने बताया कि उन्होंने बाबा भोलेनाथ से अपने मम्मी-पापा की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की है। इसी मनोकामना को लेकर दोनों ने हरिद्वार से कांवड़ उठाई। नन्हे कंधों पर कांवड़ का भार था, लेकिन चेहरे पर थकान से ज्यादा उत्साह नजर आया। नन्ही बहनों की यह कांवड़ यात्रा केवल आस्था की कहानी नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रति उनके निश्छल प्रेम की भी मिसाल बन गई है।

एक सप्ताह पहले हरिद्वार से शुरू हुई दोनों बहनों की यात्रा सोमवार को मेरठ पहुंच तो कई जगह लोगों ने दोनों को देखकर उनका उत्साह बढ़ाया और आशीर्वाद दिया। महक और अनन्या भी पूरे उत्साह के साथ बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ती रहीं। कांवड़ से लाए गए जल को शिवलिंग पर अर्पित करते समय उनकी सबसे बड़ी प्रार्थना यही थी कि उनके मम्मी-पापा हमेशा स्वस्थ रहें और उनकी उम्र लंबी हो।