Singapore New Temple: सिंगापुर में बनेगा भव्य श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर, केरल की पारंपरिक शैली में होगा निर्माण; जानें क्या है खास?

सिंगापुर सरकार ने यिशून एवेन्यू 3 पर 'श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर' (SGAT) के लिए जमीन आवंटित कर दी है। केरल की पारंपरिक 'गेबल' शैली और सबरीमाला की तर्ज पर 18 सीढ़ियों वाले इस मंदिर का निर्माण सितंबर 2026 तक शुरू होगा। क्या यह मंदिर सिंगापुर में हिंदू संस्कृति का नया केंद्र बनेगा?

Singapore New Temple

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 2, 2026

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Singapore New Temple: सिंगापुर में रहने वाले हिंदू समुदाय के लिए एक हर्षोल्लास वाली खबर सामने आई है। द्वीप राष्ट्र की सरकार ने समुदाय की बढ़ती आध्यात्मिक और सामाजिक जरूरतों को देखते हुए एक नए भव्य हिंदू मंदिर के निर्माण हेतु जमीन आवंटित की है। यह नया मंदिर यिशुन एवेन्यू 3 (Yishun Avenue 3) के रणनीतिक क्षेत्र में बनाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल अगस्त या सितंबर के महीने तक इस मंदिर का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू होने की प्रबल संभावना है। यह सिंगापुर का 25वां हिंदू मंदिर होगा। गौरतलब है कि इससे पहले साल 2006 में ‘अरुल्मिगु वेलमुरुगन ज्ञानमुनिश्वरर मंदिर’ का निर्माण हुआ था, जो यहां का 24वां मंदिर था। अब करीब दो दशक बाद एक नए मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है।

भगवान कृष्ण और अय्यप्पा को समर्पित: सिंगापुर में अपनी तरह का पहला धाम

इस मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर (SGAT) रखा गया है। यह मंदिर मुख्य रूप से दो प्रमुख देवताओं—भगवान गुरुवायूरप्पन (जो भगवान कृष्ण का ही एक बाल रूप हैं) और भगवान अय्यप्पा को समर्पित होगा। वर्तमान में सिंगापुर में इन दोनों देवताओं के लिए समर्पित कोई अलग और स्वतंत्र मंदिर मौजूद नहीं है। मंदिर प्रबंधन की योजना के अनुसार, यहां अनुष्ठानों और सेवा के लिए विशेष रूप से केरल से पुजारियों को बुलाया जाएगा, जिनमें प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर से जुड़े अनुभवी पुजारी भी शामिल होंगे। यह मंदिर ‘श्री महा मरियम्मन’ और ‘पवित्रा वृक्ष बालासुब्रमणियर’ मंदिर के समीप ही स्थित होगा, जिससे यह क्षेत्र एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरेगा।

उत्तरी सिंगापुर के भारतीयों के लिए वरदान: राज्य मंत्री दिनेश वासु दास का बयान

योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए सिंगापुर के संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने बताया कि देश के उत्तरी हिस्से में भारतीय मूल के लोगों की घनी आबादी है। ऐसे में यह मंदिर स्थानीय निवासियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य देवताओं के साथ-साथ यहां अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की भी पूर्ण व्यवस्था होगी। यह मंदिर उन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा जो भारत के सबरीमला मंदिर की तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग भक्तों के लिए, जो लंबी यात्राएं करने में असमर्थ हैं, यह मंदिर घर के पास ही वैसी ही आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगा।

सांस्कृतिक मेलजोल का केंद्र: गृह मंत्री के. शणमुगम ने जताई खुशी

सिंगापुर के गृह मंत्री के. शणमुगम ने इस परियोजना का स्वागत करते हुए कहा कि यह मंदिर लंबे समय से मलयाली समुदाय की एक बड़ी आकांक्षा थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल मलयाली ही नहीं, बल्कि तमिल, उत्तर भारतीय और अन्य समुदायों के हिंदू भी भगवान गुरुवायूरप्पन और अय्यप्पा में अटूट श्रद्धा रखते हैं। सबरीमाला की कठिन 41 दिनों की व्रत परंपरा और गुरुवायूर मंदिर की महत्ता को देखते हुए, सिंगापुर में इस मंदिर का होना सभी हिंदू भक्तों के लिए गौरव की बात है। यह मंदिर न केवल पूजा का स्थान होगा, बल्कि विभिन्न भाषाई और क्षेत्रीय समूहों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी करेगा।

स्थापत्य कला और सामाजिक एकता: केरल शैली और सामंजस्य वृत्त की अवधारणा

इस मंदिर की वास्तुकला अत्यंत विशिष्ट होने वाली है। यह पारंपरिक ऊंचे गोपुरमों के बजाय केरल की पारंपरिक मंदिर शैली से प्रेरित होगी, जिसमें लकड़ी का काम और ढलवां छतें प्रमुख होंगी। यह डिजाइन प्राकृतिक हवा के प्रवाह (Cross Ventilation) को बेहतर बनाएगी। मंदिर में एक ‘सामंजस्य वृत्त’ (Harmony Circle) भी बनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देना है। परिसर में एक बहुउद्देशीय हॉल भी होगा जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। लगभग 60 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में, जहाँ भारतीय मूल के लोग लगभग 7 प्रतिशत हैं, यह मंदिर सामाजिक समरसता का एक नया प्रतीक बनेगा।

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