जमीन-प्रॉपर्टी विवादों पर अहम निर्णय, हाईकोर्ट बोला- सिर्फ नामांतरण या टैक्स भुगतान से मालिकाना हक साबित नहीं होता

 ग्वालियर जमीन खरीदने से पहले केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स के दस्तावेज देखकर संतुष्ट हो जाना भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक नहीं था, तो उसके द्वारा किया गया पूरा सौदा अवैध माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नगर पालिका में नाम दर्ज होने या टैक्स जमा करने मात्र से किसी व्यक्ति का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। यह टिप्पणी अशोकनगर के लंबरदार मोहल्ले स्थित धनुषधारी बांके देव मंदिर की करीब 98 बीघा भूमि से जुड़े विवाद की सुनवाई के

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Published On :

जून 19, 2026

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 ग्वालियर
जमीन खरीदने से पहले केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स के दस्तावेज देखकर संतुष्ट हो जाना भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक नहीं था, तो उसके द्वारा किया गया पूरा सौदा अवैध माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नगर पालिका में नाम दर्ज होने या टैक्स जमा करने मात्र से किसी व्यक्ति का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता।

यह टिप्पणी अशोकनगर के लंबरदार मोहल्ले स्थित धनुषधारी बांके देव मंदिर की करीब 98 बीघा भूमि से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान की गई। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन मंदिर के नाम दर्ज है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के पुत्र कमलदास ने स्वयं को जमीन का मालिक बताकर इसके प्लॉट काटकर कई लोगों को बेच दिए। खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और वर्षों तक प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा किया।

खंडपीठ ने खरीदारों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का पुजारी या महंत संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केवल उसका प्रबंधक होता है। इसलिए उसके पास संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के पास वैध स्वामित्व नहीं है, वह जमीन का हस्तांतरण नहीं कर सकता। ऐसे में खरीदारों को भी मालिकाना अधिकार नहीं मिलेगा और उन्हें अतिक्रमणकारी माना जाएगा। कोर्ट ने दोहराया कि रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे दस्तावेज स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, बल्कि मूल मालिकाना हक की जांच सबसे महत्वपूर्ण है।

 

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