Maharashtra Municipal Elections: मराठवाड़ा क्षेत्र के जालना से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में आरोपी रहे श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निगम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद पंगारकर और उनके समर्थकों ने शहर में जोरदार जश्न मनाया, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
BMC Results: मुंबई BMC में सत्ता परिवर्तन, BJP की ऐतिहासिक जीत, ठाकरे भाइयों को झटका
वार्ड 13 का चुनावी परिणाम और पंगारकर का दबदबा
आपको बता दे कि, जालना नगर निगम के वार्ड नंबर 13 से चुनावी मैदान में उतरे श्रीकांत पंगारकर ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को भारी मतों के अंतर से शिकस्त दी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्य क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवारों को पछाड़ते हुए 2,621 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस वार्ड से अपना कोई आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारा था, जिसका सीधा लाभ पंगारकर को मिला।
5 सितंबर 2017: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का काला दिन
बताते चले कि, गौरी लंकेश की हत्या भारतीय पत्रकारिता के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है। 5 सितंबर, 2017 को बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर स्थित उनके आवास के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। जांच में सामने आया कि अमोल काले के नेतृत्व में 18 कट्टरपंथी हिंदुत्व समर्थकों के एक समूह ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। श्रीकांत पंगारकर को इसी साजिश का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
षड्यंत्र के सूत्रधार और मामले के सह-आरोपी
इस हाई-प्रोफाइल मामले में श्रीकांत पंगारकर के साथ कई अन्य लोगों को नामजद किया गया था। साल 2021 में मुख्य आरोपी अमोल काले के साथ अमित देगवेकर, सुजीत कुमार, गणेश मिस्किन, अमिथ बड्ड, भरत कुराने, सुरेश एचएल, राजेश बंगेरा, सुधन्वा गोंडालेकर, शरद कालस्कर, मोहन नायक, वासुदेव सूर्यवंशी, मनोहर एडवे, नवीन कुमार और रुशिकेश देओडिकर पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे।
शिवसेना से नाता और हिंदू जनजागृति समिति का सफर
श्रीकांत पंगारकर का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है। वह 2001 से 2006 के बीच अविभाजित शिवसेना के जालना नगर परिषद सदस्य रह चुके हैं। हालांकि, 2011 में शिवसेना द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद उन्होंने दक्षिणपंथी संगठन हिंदू जनजागृति समिति का दामन थाम लिया था। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में वापसी की कोशिश की थी, लेकिन सार्वजनिक आलोचना के बाद मुख्यमंत्री ने उनकी सदस्यता पर रोक लगा दी थी।
गिरफ्तारी, यूएपीए और जमानत की कानूनी प्रक्रिया
पंगारकर की मुश्किलें अगस्त 2018 में तब बढ़ीं जब महाराष्ट्र एटीएस ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से बम और हथियार बरामद किए। उन पर विस्फोटक अधिनियम और यूएपीए (UAPA) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद, गौरी लंकेश हत्याकांड में कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन्हें 4 सितंबर, 2024 को जमानत दी, जिसके बाद वे वापस जालना आए और चुनावी राजनीति में सक्रिय हुए।










