Bihar Politics: नीतीश ने फिर चला ‘नालंदा कार्ड’, श्रवण कुमार संभालेंगे JDU विधायक दल की कमान

बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सबसे पुराने साथी श्रवण कुमार पर बड़ा दांव खेला है। नालंदा से सात बार के विधायक और कैबिनेट मंत्री श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नया नेता नियुक्त किया गया है। जेपी आंदोलन से नीतीश के साथ जुड़े श्रवण कुमार की यह नियुक्ति पार्टी के कोर वोट बैंक को साधने की एक बड़ी रणनीति मानी जा रही है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 21, 2026

Bihar Politics: बिहार की सत्ता के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपने सबसे पुराने और वफादार सिपहसालार पर भरोसा जताया है। जेडीयू (JDU) के दिग्गज नेता और नीतीश सरकार में कद्दावर मंत्री श्रवण कुमार को आधिकारिक तौर पर जेडीयू विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया है। नीतीश कुमार के विधान परिषद जाने और मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद यह पद रिक्त हुआ था, जिसे अब श्रवण कुमार के अनुभव और निष्ठा से भरा गया है। विधानसभा अध्यक्ष को इस फैसले की विधिवत सूचना दे दी गई है।

नीतीश और श्रवण कुमार का राजनीतिक सफर

बताते चले कि, श्रवण कुमार महज एक नेता नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। कुर्मी समाज (Kurmi Community) से आने वाले श्रवण कुमार की राजनीतिक यात्रा 1974 के ऐतिहासिक जेपी आंदोलन (JP Movement) से शुरू हुई थी। पिछले 50 वर्षों से उन्होंने नीतीश कुमार का साथ एक साये की तरह दिया है। चाहे पार्टी में टूट हुई हो या गठबंधन के समीकरण बदले हों, श्रवण कुमार ने कभी नीतीश का साथ नहीं छोड़ा। यही कारण है कि आज उन्हें विधायक दल के नेतृत्व (Legislative Leadership) की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नालंदा का अभेद्य किला

श्रवण कुमार की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे साल 1995 से लगातार अपने गृह जिले की नालंदा विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। लगभग 30 सालों से इस क्षेत्र की जनता का उन पर अटूट विश्वास बना हुआ है। वे नीतीश कैबिनेट में ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister) के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलता साबित कर चुके हैं। इसके अलावा, 2005 से वे जेडीयू के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद पर रहकर पार्टी के विधायकों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम भी बखूबी कर रहे हैं।

कोर वोट बैंक को साधने की रणनीति

नीतीश कुमार के इस फैसले को केवल एक नियुक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी रणनीति (Political Strategy) के रूप में देखा जा रहा है। श्रवण कुमार उसी स्वजातीय पृष्ठभूमि (कुर्मी जाति) से आते हैं, जिससे मुख्यमंत्री खुद आते हैं। उन्हें जेडीयू विधायक दल का मुखिया बनाकर नीतीश कुमार ने अपने आधार वोट बैंक को यह कड़ा संदेश दिया है कि पार्टी की बागडोर और सत्ता का केंद्र आज भी उनके सबसे विश्वसनीय और पुराने साथियों के पास सुरक्षित है।

पार्टी में बढ़ता कद

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद श्रवण कुमार पर अब बड़ी जिम्मेदारी होगी। सदन के भीतर पार्टी के सभी विधायकों को एकजुट रखना और सरकार के फैसलों को मजबूती से रखना उनकी प्राथमिकता होगी। विपक्षी दलों के हमलों के बीच, नीतीश कुमार ने एक ऐसे अनुभवी राजनेता (Veteran Politician) को आगे किया है जो सदन की बारीकियों और पार्टी की विचारधारा को गहराई से समझता है। यह कदम आगामी चुनावों के मद्देनजर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।