क्या सूर्य ग्रहण के समय सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए? जानिए शास्त्रीय मान्यताएँ

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण का गहरा अध्यात्मिक महत्व माना जाता है. ग्रहण के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है. ग्रहण के दौरान सूतक काल, खान-पान के नियम और शुद्धिकरण का विशेष ध्यान रखा जाता है. आमतौर पर रोजाना लोग सूर्य देव की कृपा पाने के लिए उनको अर्घ्य यानी जल दिया करते हैं. मान्यताओं के अनुसार, रोजाना सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की नकारात्मकता दूर हो जाती है, लेकिन सूर्य ग्रहण के समय लोगों के मन में ये सवाल हमेशा उठता है कि इस दौरान सूर्य देव को अर्घ्य दिया

Wrriten By :

Editor

Published On :

फ़रवरी 14, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण का गहरा अध्यात्मिक महत्व माना जाता है. ग्रहण के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है. ग्रहण के दौरान सूतक काल, खान-पान के नियम और शुद्धिकरण का विशेष ध्यान रखा जाता है. आमतौर पर रोजाना लोग सूर्य देव की कृपा पाने के लिए उनको अर्घ्य यानी जल दिया करते हैं.

मान्यताओं के अनुसार, रोजाना सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की नकारात्मकता दूर हो जाती है, लेकिन सूर्य ग्रहण के समय लोगों के मन में ये सवाल हमेशा उठता है कि इस दौरान सूर्य देव को अर्घ्य दिया जा सकता है या नहीं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना सही है गलत. इसको लेकर शास्त्र क्या कहते हैं?

सूर्य ग्रहण में सूर्य को जल देना वर्जित

वैदिक काल से ही भगवान सूर्य को सुबह के समय जल चढ़ाना दिनचर्या का एक भाग रहा है. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि तांबे के लोटे में सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है. सेहत अच्छी रहती है और कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, लेकिन ग्रहण काल में हालात पूरी तरह बदल जाते हैं. धार्मिक सिद्धांतों और ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के समय सूर्य को अर्घ्य देना वर्जित है.

मान्यता है कि ग्रहण के समय राहु-केतु का प्रभाव बढ़ता जाता है, जिससे सूर्य की सकारात्मक उर्जा बाधित होती है. ऐसे समय में जल चढ़ाने से शुभ फलों के स्थान पर प्रतिकूल प्रभाव जीवन पर पड़ सकते हैं. अर्घ्य सूर्य को देखकर दिया जाता है, लेकिन धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टियों से ग्रहण के समय सूर्य को देखना आंखों के लिए हानिकारक और अशुभ माना गया है. ग्रहण के समय से पहले सूतक काल में पूजा-पाठ करना मना होता है.

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब?

सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है. साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन माह की अमावस्या के दिन 17 फरवरी को लगेगा. ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहते हैं. 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर लगेगा. इसका समापन 07 बजकर 57 मिनट पर होगा. ये ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा. ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. ऐसे में इसका सूतक भी नहीं माना जाएगा.

Leave a Comment

2