Shivaji Maharaj Jayanti: छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर भीड़ हुई बेकाबू, कई घायल

पुणे के जुन्नर तालुका में स्थित शिवनेरी किले पर भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। संकरे रास्तों पर भीड़ बढ़ने से महिलाएं और बच्चे घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 19, 2026

Shivaji Maharaj Jayanti: महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर तालुका में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थान शिवनेरी किला पर इस साल शिवजयंती के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। राज्य के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु, युवा संगठनों के कार्यकर्ता और शिवज्योत लेकर आए लोग दर्शन के लिए किले पहुंचे। इसके चलते किले का परिसर रात से ही पूरी तरह खचाखच भरा हुआ था।

भीड़ की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की तैयारियां अपर्याप्त पाईं गईं। अंबरखाना के नीचे स्थित हाथी दरवाजा और गणेश दरवाजा जैसे संकरे रास्तों पर अचानक भीड़ जमा हो गई। इन रास्तों की चौड़ाई सीमित होने के कारण एक साथ बड़ी संख्या में लोग आगे बढ़े, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

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महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग घायल

Shivaji Maharaj Jayanti
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर भीड़ हुई बेकाबू

इस भगदड़ में कुछ महिलाएं और छोटे बच्चे गिर पड़े और कई लोग हल्के तौर पर घायल हो गए। घायलों को तुरंत जुन्नर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई।

प्रशासन की तैयारी पर उठ रहे सवाल

हर साल शिवजयंती के मौके पर भारी संख्या में लोग शिवनेरी किले में पहुंचते हैं। बावजूद इसके भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों में पर्याप्त तैयारी नहीं होने पर अब प्रशासन की योजना पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों के लिए एंट्री-एग्जिट प्लान, बैरिकेडिंग और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे इस तरह की आपातकालीन स्थिति से बचा जा सकेगा और भगदड़ जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।

शिवनेरी किले का ऐतिहासिक महत्व

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को इसी शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता शाहाजी भोंसले और मां जीजीबाई थीं। बचपन से ही शिवाजी की मां ने उन्हें जिम्मेदारी और अपनी जगह तथा लोगों के प्रति गर्व का भाव सिखाया। जीजीबाई ने उन्हें महाभारत और रामायण की कथाओं के माध्यम से वीरता, न्याय और कूटनीति की शिक्षा दी।

शिवाजी का पालन-पोषण इसी किले में हुआ, इसलिए आज यह किला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि शिवजयंती जैसे अवसरों पर श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन जाता है। किले की संकरी गलियों और प्राचीन संरचनाओं के कारण यहां भीड़ नियंत्रण हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है, जिसे भविष्य में बेहतर सुरक्षा उपायों के माध्यम से संभालना आवश्यक है।

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