Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र के परभणी महानगर पालिका में हाल ही में हुए मेयर चुनाव ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के गठबंधन ने यहां सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। इस चुनाव की सबसे बड़ू खबर सैयद इकबाद का मेयर चुना जाना है, जो पार्टी के गठन के बाद इस पद पर बैठने वाले पहले मुस्लिम नेता बने हैं। उनके साथ कांग्रेस के गणेश देशमुख को डिप्टी मेयर चुना गया है।
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कौन हैं नवनिर्वाचित मेयर सैयद इकबाल?
सैयद इकबाल परभणी के एक स्थानीय सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं और उन्होंने पहली बार पार्षद के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वे प्रमुख व्यवसायी सैयद अब्दुल खादर के छोटे भाई हैं, जिनकी परभणी के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में गहरी पैठ मानी जाती है। पूर्व में उनके परिवार का जुड़ाव AIMIM से रहा है, लेकिन वर्तमान में उन्हें शिवसेना (UBT) सांसद संजय जाधव का अत्यंत करीबी माना जाता है।
चुनावी गणित: आंकड़ों की बाजी
मेयर पद के लिए हुए मतदान में समीकरण स्पष्ट रूप से विपक्षी खेमे के पक्ष में रहा:
- मेयर पद: सैयद इकबाल (शिवसेना UBT) को 39 वोट मिले, जबकि भाजपा के तिरुमला खिल्लारे 26 वोटों पर सिमट गए।
- डिप्टी मेयर पद: कांग्रेस के गणेश देशमुख को 37 वोट मिले, जिन्होंने अजीत पवार गुट (NCP) की नाझेमा अब्दुल रहीम (27 वोट) को पराजित किया।
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‘खान बनाम बाण’: विचारधारा पर छिड़ी जंग
सैयद इकबाल की नियुक्ति के बाद भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। 1980 के दशक में शिवसेना का नारा “खान बनाम बाण” (मुस्लिम पहचान बनाम शिवसेना का तीर-कमान) काफी प्रसिद्ध था। विरोधियों का तर्क है कि जो पार्टी कभी कट्टर हिंदुत्व और मराठी अस्मिता की बात करती थी, वह अब “तुष्टीकरण” की राजनीति कर रही है।
- बीजेपी का रुख: विधायक प्रसाद लाड और मुंबई की पूर्व मेयर रितु तावड़े ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे अपनी मूल पहचान खो चुके हैं और सत्ता के लिए अपनी विचारधारा से समझौता कर रहे हैं।
- एकनाथ शिंदे का प्रहार: मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व छोड़ने के कारण ही उद्धव ठाकरे की यह स्थिति हुई है।
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शिवसेना (UBT) और सैयद इकबाल का पलटवार

इन आरोपों का जवाब देते हुए सैयद इकबाल ने अपनी पहचान को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मैं एक मराठी व्यक्ति हूँ और मेरी मातृभाषा मराठी है। उद्धव ठाकरे जाति-धर्म से ऊपर उठकर विकास की राजनीति करते हैं।”
वहीं, संजय राउत ने बागी गुट पर तंज कसते हुए कहा कि “गद्दारों” से बेहतर वे निष्ठावान मुसलमान हैं जो पार्टी के साथ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय भी मराठी समाज का अभिन्न अंग है और उन्हें लोकतांत्रिक पदों से वंचित नहीं रखा जा सकता।
परभणी का राजनीतिक महत्व
मराठवाड़ा का यह महत्वपूर्ण शहर अपनी मिश्रित आबादी (20-25% मुस्लिम) के लिए जाना जाता है। यहाँ की राजनीति हमेशा मराठा, दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के बीच संतुलन पर टिकी रही है। आगामी बीएमसी और राज्य चुनावों को देखते हुए, परभणी का यह “प्रयोग” महाराष्ट्र की भावी राजनीति की दिशा तय कर सकता है।









