वन्यजीव संरक्षण में चरवाहों की बढ़ेगी भूमिका, टाइगर फाउंडेशन ने 22.79 करोड़ रुपये की योजनाओं को दी हरी झंडी

भोपाल  मध्य प्रदेश के जंगलों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव (मानव-वन्यजीव संघर्ष) को रोकने के लिए वन विभाग अब एक बेहद जमीनी स्तर का प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर 'चरवाहा सम्मेलन' आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के जरिए उन ग्रामीणों और चरवाहों को सीधे जागरूक किया जाएगा, जो मवेशी चराने के लिए अक्सर जंगलों के भीतर या संरक्षित क्षेत्रों के आसपास जाते हैं। उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और खुद की सुरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे। यह महत्वपूर्ण फैसला वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव की अध्यक्षता

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Published On :

जून 11, 2026

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भोपाल
 मध्य प्रदेश के जंगलों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव (मानव-वन्यजीव संघर्ष) को रोकने के लिए वन विभाग अब एक बेहद जमीनी स्तर का प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर 'चरवाहा सम्मेलन' आयोजित किए जाएंगे।

इन सम्मेलनों के जरिए उन ग्रामीणों और चरवाहों को सीधे जागरूक किया जाएगा, जो मवेशी चराने के लिए अक्सर जंगलों के भीतर या संरक्षित क्षेत्रों के आसपास जाते हैं। उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और खुद की सुरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे।

यह महत्वपूर्ण फैसला वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित 'मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति' की 22वीं बैठक में लिया गया। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फील्ड में पारदर्शिता और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए अब हर तीन महीने में यह बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।

22.79 करोड़ से सुधरेंगे जंगल के हालात
बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके रहन-सहन (आवास विकास) को बेहतर बनाने के लिए 22.79 करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दी गई। इस राशि का उपयोग इन मुख्य कामों में होगा:

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना: इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान।

ब्लैक बक कैप्चर ऑपरेशन: काले हिरणों के संरक्षण और उनके सुरक्षित रेस्क्यू/स्थानांतरण के लिए विशेष अभियान चलाना।

रिसर्च और क्षमता संवर्धन: वन्यजीवों के व्यवहार पर अध्ययन करना और वन अमले को आधुनिक तकनीकों से लैस करना।

वार्षिक कार्ययोजना मंजूर: इसके साथ ही समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी एनुअल प्लानिंग को भी हरी झंडी दे दी है।

बैठक के दौरान प्रदेश के तमाम टाइगर रिजर्वों (जैसे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच आदि) के संचालकों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी रिपोर्ट पेश की।

बैठक में वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा, टाइगर सेल के अध्यक्ष एवं अपर पुलिस महानिदेशक सहित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव भी शामिल हुए। प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों के संचालकों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भागीदारी की।

 

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