Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बड़े घटनाक्रम में अपने देश वापस लौटने का ऐलान कर दिया है। 2024 के तख्तापलट के बाद से भारत में रह रहीं हसीना ने दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने की समयसीमा तय की है। रॉयटर्स को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने अपने भविष्य के इरादों और देश की वर्तमान स्थिति पर खुलकर बात की है।
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‘मैं अपनी धरती पर ही मरना चाहती हूं’
शेख हसीना का यह फैसला उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और भावुकता का मिश्रण है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके वापस लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी हत्या भी की जा सकती है। इसके बावजूद, उन्होंने अपने निर्णय को अटल बताया है। हसीना ने भावुक होकर कहा, “मेरी इच्छा है कि यदि मेरी मृत्यु निश्चित है, तो वह मेरी अपनी धरती पर हो, जहाँ मेरे माता-पिता दफन हैं और जहाँ उनका खून बहा था।” यह बयान उनकी उस गहरी जड़ों और लगाव को दर्शाता है जो उन्हें अपने देश की मिट्टी से जोड़ता है।
मौत की सजा और कानूनी चुनौतियां
2024 में हुए व्यापक छात्र आंदोलन और तख्तापलट के बाद हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा था। उनके सत्ता से हटने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। बांग्लादेश की युद्ध अपराध अदालत ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में कथित संलिप्तता के लिए उन्हें अनुपस्थिति में ही मौत की सजा सुनाई। शेख हसीना ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनके अनुसार, यह उन पर राजनीतिक दबाव और प्रतिशोध की कार्रवाई है। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही उनकी अवामी लीग पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया है और उनके पिता से जुड़े स्मारकों को भी नष्ट कर दिया गया है, जो राजनीतिक विद्वेष की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
‘अदालत नहीं, जनता करे फैसला’
शेख हसीना ने जेल जाने के डर को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि वे पहले भी कई बार जेल जा चुकी हैं, इसलिए यह उनके लिए कोई नई चुनौती नहीं है। अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने माना कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली किसी भी सरकार से गलतियां हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार के कार्यों का सही मूल्यांकन न तो अदालत और न ही उनके राजनीतिक विरोधी कर सकते हैं। हसीना ने कहा, “किसी सरकार ने अच्छा काम किया या बुरा, इसका अंतिम फैसला जनता को ही करना चाहिए।”
भविष्य की अनिश्चितता
दिसंबर 2026 में हसीना की संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला सकती है। जहाँ एक तरफ उन पर मौत की सजा का कानूनी तलवार लटकी हुई है, वहीं दूसरी तरफ उनके समर्थक इस कदम को एक बड़ी राजनीतिक वापसी के रूप में देख रहे हैं। क्या हसीना का यह आत्मघाती कदम बांग्लादेश की राजनीति को नई दिशा देगा या वहां के हालात और अधिक जटिल हो जाएंगे, यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल, शेख हसीना का यह साहस भरा ऐलान पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुर्खियों में छाया हुआ है।
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