Sheikh Hasina Extradition : शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत का बड़ा बयान, तय समयसीमा नहीं, कानूनी प्रक्रिया जारी

शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि उनकी वापसी के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई जा सकती। बांग्लादेश की प्रत्यर्पण मांग कानूनी प्रक्रिया के तहत जांची जा रही है और मामले में अदालतों की भूमिका भी है।

Sheikh Hasina Extradition

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 4, 2026

Sheikh Hasina Extradition : भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर अभी तक कोई भी निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। भारत को बांग्लादेश की तरफ से हसीना को वापस भेजने के संबंध में औपचारिक अनुरोध मिल चुका है। फिलहाल इस संवेदनशील अनुरोध की कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर गहन जांच की जा रही है। भारत सरकार का कहना है कि इस मामले में जो भी अंतिम फैसला लिया जाएगा, वह पूरी तरह से स्थापित कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर ही तय किया जाएगा।

ढाका सम्मेलन में भारतीय उच्चायुक्त का बयान

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026’ के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। इस कार्यक्रम में बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए स्थिति साफ की। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कहा कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण के पूरे मामले में भारत इस समय कोई भी निश्चित समयसीमा बताने की स्थिति में नहीं है। यह पूरा मामला अपनी तय कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है और इसका पालन करना आवश्यक है।

राजनीतिक संकट के बाद भारत आईं थीं हसीना

आपको बता दें कि शेख हसीना अगस्त 2024 के दौरान बांग्लादेश में अचानक उपजे भारी राजनीतिक संकट और उथल-पुथल के बीच देश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय भारतीय अधिकारियों ने हालात का आकलन करते हुए स्पष्ट किया था कि परिस्थितियां बेहद तेजी से बिगड़ रही थीं। ऐसे हालात में मानवीय संवेदनाओं और सुरक्षा संबंधी गंभीर कारणों को देखते हुए भारत के पास उन्हें अपने देश में शरण देने या आने की अनुमति देने के अलावा बहुत कम विकल्प बचे हुए थे।

स्थिरता बनाए रखने के लिए लिया गया था जरूरी निर्णय

भारत सरकार का यह भी कहना है कि उस संकटपूर्ण समय में शेख हसीना को भारत में प्रवेश की अनुमति देना सीमा पार क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संकट के बीच क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी कदम था। वर्तमान समय में बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार सत्ता संभाल रही है। इसी नई सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर भारत से संपर्क साधा है और शेख हसीना को वापस बांग्लादेश भेजने के लिए औपचारिक अनुरोध प्रेषित किया है।

2013 की प्रत्यर्पण संधि के तहत होगी पूरी कार्रवाई

भारत और दोनों देशों के बीच भगोड़े या आरोपी नागरिकों के प्रत्यर्पण के लिए वर्ष 2013 में एक आधिकारिक संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद वर्ष 2016 में इस संधि में कुछ संशोधन भी किए गए थे। इसी द्विपक्षीय संधि के प्रावधानों के अंतर्गत दोनों देश एक-दूसरे के यहां वांछित आरोपियों को वापस सौंपते हैं। हालांकि, इस संधि में राजनीतिक प्रकृति के अपराधों और कुछ विशिष्ट घरेलू न्यायिक मामलों से जुड़े कुछ जरूरी अपवाद भी शामिल हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है।

कानूनी जांच जारी, सीधे राजनीतिक फैसला संभव नहीं

चूंकि भारत में इस समय शेख हसीना के प्रत्यर्पण के पूरे अनुरोध की विधिक और कानूनी जांच चल रही है, इसलिए सरकार इस पर सीधे तौर पर कोई भी एकतरफा राजनीतिक फैसला नहीं ले सकती है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय अदालतों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक रहने वाली है। आगे की हर एक कार्रवाई और अंतिम निर्णय पूरी तरह से भारतीय कानूनों और विधिक प्रक्रियाओं के दायरे के आधार पर ही तय किया जाएगा, जिसमें समय लगना स्वाभाविक है।

प्रत्यर्पण विवाद के बावजूद जारी हैं द्विपक्षीय बातचीत

शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी और कूटनीतिक मामला चलने के बावजूद, भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है। दोनों पड़ोसी देश द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा ग्रिड कनेक्टिविटी और सीमा पार के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं। भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि अंतरराज्यीय संबंध स्थिर रहने चाहिए।

आंतरिक राजनीति और रणनीतिक रिश्तों के बीच संतुलन

भारत का यह भी मानना है कि बांग्लादेश की अंदरूनी राजनीतिक परिस्थितियों या अन्य देशों के साथ उसके बदलते कूटनीतिक रिश्तों से दोनों देशों के मूल द्विपक्षीय संबंध प्रभावित नहीं होने चाहिए। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारत को इस प्रत्यर्पण संधि, मानवीय पहलुओं तथा बांग्लादेश के साथ अपने लंबे समय के रणनीतिक और ऐतिहासिक रिश्तों के बीच बेहद सावधानी के साथ एक मजबूत संतुलन बनाकर चलना होगा।