Shashi Tharoor: राजनीति गलियारों में अक्सर पार्टियों के बीच बयानबाजी देखने को मिलती रहती है। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही असहजता एक बार फिर सामने आई है। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने 23 जनवरी 2026 को दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक से दूरी बना ली। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत केरल इकाई के वरिष्ठ नेता आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करने वाले थे।
थरूर के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि वे इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि वे कालीकट में आयोजित एशिया के सबसे बड़े साहित्य महोत्सव केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई पुस्तक, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है, पर बोलने के लिए मौजूद हैं।
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नाराजगी की वजह
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान शशि थरूर को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हें पर्याप्त मंच नहीं दिया गया, जिससे वे आहत हुए। यही कारण है कि उन्होंने दिल्ली की बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया। पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने यह माना जा रहा है कि थरूर की नाराजगी लंबे समय से सुलग रही थी।
पार्टी लाइन से अलग रुख

पिछले कुछ महीनों में थरूर के कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर चुके हैं। उन्होंने कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना की, जिसे पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया। अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों पर उनकी टिप्पणियों को भी पार्टी के भीतर अलग दृष्टिकोण के रूप में देखा गया।
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गौतम गंभीर के साथ सेल्फी
22 जनवरी 2026 को शशि थरूर ने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कोच और पूर्व भाजपा सांसद गौतम गंभीर के साथ एक सेल्फी साझा की। उन्होंने गंभीर के काम की सराहना करते हुए लिखा कि भारत में प्रधानमंत्री के बाद यह दूसरा सबसे कठिन काम है। इस टिप्पणी पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि थरूर ने खुद प्रधानमंत्री मोदी के कठिन कार्यभार को स्वीकार किया है, जबकि विपक्ष लगातार उन पर सवाल उठाता है। भाजपा ने कांग्रेस और थरूर के बीच बढ़ती दूरी को लेकर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी जल्द ही उनके खिलाफ कदम उठा सकती है।
चुनावी रणनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। शशि थरूर राज्य में एक लोकप्रिय चेहरा हैं और शहरी मध्यम वर्ग व युवा मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। ऐसे में उनका अहम बैठकों से दूर रहना पार्टी के लिए रणनीतिक नुकसान साबित हो सकता है










