Share Market Crash: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निफ्टी 25,100 से नीचे, FII बिकवाली और कमजोर रुपया असर

भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त बिकवाली देखी गई। विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में अरबों रुपये निकाल लिए, जिससे निफ्टी 25,100 के स्तर को भी नहीं बचा सका। कमजोर रुपये और वैश्विक मंदी की आहट ने आग में घी का काम किया है। क्या सोमवार को बाजार संभलेगा या गिरावट और गहराएगी?

Share Market Crash

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 23, 2026

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक शुक्रवार, 23 जनवरी को तेज गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबारी सत्र के अंत तक बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा, जिसके चलते निफ्टी 25,100 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। सेंसेक्स 769.67 अंक यानी 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,537.70 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 241.25 अंक या 0.95 प्रतिशत टूटकर 25,048.65 पर आ गया।

सेंसेक्स के अधिकांश शेयर लाल निशान में

आज के कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से अधिकांश शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। खासतौर पर अदानी पोर्ट्स, इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक और पावर ग्रिड के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। बाजार की कमजोरी का असर लगभग सभी प्रमुख कंपनियों पर पड़ा, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट दबाव में रहा।

निफ्टी के प्रमुख नुकसान और मुनाफे वाले शेयर

निफ्टी इंडेक्स में भी आज व्यापक गिरावट दर्ज की गई। अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन और सिप्ला जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर डॉ. रेड्डीज लैब्स, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, हिंदाल्को और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।

सेक्टोरल इंडेक्स में चौतरफा बिकवाली

सेक्टोरल फ्रंट पर आज कोई भी इंडेक्स हरे निशान में नहीं रह सका। कैपिटल गुड्स, पावर, रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा बीएसई मिडकैप इंडेक्स करीब 1.5 प्रतिशत टूटा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली, जो बाजार में व्यापक कमजोरी को दर्शाता है।

भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने बढ़ाई चिंता

बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं हैं। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव कम होने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अमेरिका और नाटो के बीच कथित समझौते को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे के बावजूद आधिकारिक पुष्टि न होने से निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

रुपये की कमजोरी से बाजार पर दबाव

भारतीय रुपया भी बाजार की गिरावट का एक अहम कारण बना। शुक्रवार को इंट्रा-डे कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। पिछले साल लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट के बाद, चालू वर्ष में अब तक रुपया 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

एफआईआई की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली ने भी बाजार की तेजी पर ब्रेक लगाया है। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई कैश सेगमेंट में 36,500 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच चुके हैं। इस लगातार बिकवाली से बाजार का मूड कमजोर बना हुआ है।केंद्रीय बजट 2026 से पहले निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। बाजार को सरकार से इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन और एलटीसीजी टैक्स में युक्तिकरण जैसे कदमों की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी अप्रत्याशित फैसले की आशंका के चलते निवेशक फिलहाल संभलकर कदम रख रहे हैं।