Black Monday: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर आज भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार (Stock Market) में हाहाकार मच गया और शुरुआती घंटों में ही निवेशकों को भारी चपत लगी।
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ग्लोबल वॉर का घरेलू मार्केट पर असर
बताते चले कि, सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही। सुबह 9:24 बजे, BSE Sensex 1,009.39 अंक (1.24%) की भारी गिरावट के साथ 80,277.80 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इसी तरह, Nifty 50 भी 282.35 अंक (1.12%) फिसलकर 24,896.30 के स्तर पर आ गया। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Tension) के कारण निवेशकों में डर का माहौल है, जिसके चलते बाजार खुलते ही बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
प्री-मार्केट सेशन में तबाही के संकेत
आपको बता दे कि, बाजार खुलने से पहले ही प्री-ओपनिंग सेशन में तबाही के संकेत मिल चुके थे। प्री-मार्केट में सेंसेक्स 2,800 अंक और निफ्टी 500 अंकों की गिरावट के साथ गोता लगा रहे थे। हालांकि, जब आधिकारिक ट्रेडिंग शुरू हुई, तब सेंसेक्स 1,125 अंक नीचे खुला। सुबह 10:15 बजे तक बाजार ने रिकवरी की कोशिश की, लेकिन ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल सेंटीमेंट (Global Sentiment) इतने खराब रहे कि प्रॉफिट बुकिंग का दबाव कम नहीं हुआ। निवेशकों ने जोखिम उठाने के बजाय अपनी पोजीशन को सुरक्षित करना बेहतर समझा।
सप्लाई चेन पर मंडराता युद्ध का खतरा
युद्ध की स्थिति में समुद्री रास्तों और सप्लाई चेन (Supply Chain) के बाधित होने की आशंका ने पोर्ट और लॉजिस्टिक्स शेयरों (Port & Logistics Stocks) को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। अदानी पोर्ट्स के शेयर में 4.6% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि गुजरात पिपावाव पोर्ट और जेएसडब्ल्यू इंफ्रा भी 4.7% तक लुढ़क गए। सबसे बुरा हाल डेलहिवरी (Delhivery) का रहा, जिसका शेयर 10% तक टूट गया। वहीं, सरकारी कंपनी ‘कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया’ का शेयर 6.8% गिरकर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुँच गया। आईटी दिग्गज TCS भी इस बिकवाली से नहीं बच सकी और 5% की गिरावट के साथ बाजार पर दबाव बनाती रही।
सुरक्षित निवेश की ओर मुड़ा निवेशकों का रुझान
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे ‘ट्रिपल अटैक’ काम कर रहा है। युद्ध के कारण कच्चा तेल (Crude Oil) चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है, जो भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। दूसरी ओर, अनिश्चितता के माहौल में निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सोने और चांदी (Safe Haven Assets) में निवेश कर रहे हैं। सोने की कीमतों में आए उछाल ने शेयर बाजार की लिक्विडिटी को कम कर दिया है। एक्सपर्ट्स ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी है कि वे फिलहाल नई पोजीशन बनाने से बचें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।
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