Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में किस दिन क्या चढ़ाएं? जानें मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के प्रिय भोग

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को दिन के अनुसार प्रिय भोग अर्पित करें। जानिए नौ दिनों की भोग सूची और प्रसाद चढ़ाते समय ध्यान रखने वाली जरूरी बातें।

Shardiya Navratri 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 9, 2026

Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और उल्लास से भरा माना जाता है। इन नौ दिनों में जगत जननी मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां शैलपुत्री से लेकर अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री तक की आराधना का विशेष महत्व है। देवी को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा में फूल, फल, दीप और चुनरी अर्पित करने के साथ-साथ उनके प्रिय भोग लगाने की भी प्राचीन परंपरा है।

धार्मिक मान्यता है कि यदि सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ माता को उनके पसंदीदा भोग अर्पित किए जाएं, तो देवी प्रसन्न होकर घर में सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्यता का आशीर्वाद देती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि नवरात्रि के हर दिन किस देवी को कौन-सा भोग लगाना शुभ माना जाता है।

Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में किस दिन किस देवी की पूजा करें? जानें मां

नवरात्रि के पहले चार दिन

Shardiya Navratri 2026
मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के प्रिय भोग

पहला दिन (मां शैलपुत्री – गाय का शुद्ध घी): नवरात्रि के पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री और मां पार्वती के स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन देवी को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाने का विधान है। मान्यता है कि शुद्ध घी का भोग लगाने से आरोग्यता और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।

दूसरा दिन (मां ब्रह्मचारिणी – शक्कर और मिश्री): मां ब्रह्मचारिणी तप, संयम और साधना की देवी हैं। दूसरे दिन उनकी आराधना के दौरान शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। इससे जीवन में आत्मबल, धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

तीसरा दिन (मां चंद्रघंटा – दूध और खीर): साहस और शौर्य की प्रतीक मां चंद्रघंटा को तीसरे दिन दूध, दूध से बनी सफेद मिठाइयां या स्वादिष्ट खीर का भोग अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि इस भोग से मानसिक शांति और निर्भयता की प्राप्ति होती है।

चौथा दिन (मां कूष्मांडा – मालपुआ): सृष्टि की रचना करने वाली आदि शक्ति मां कूष्मांडा को चौथे दिन मालपुए का भोग लगाया जाता है। भक्त इस दिन मां से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि की कामना करते हैं।

पांचवें से नौवें दिन तक

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मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के प्रिय भोग

पाँचवा दिन (मां स्कंदमाता – केला): भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता मां स्कंदमाता ममता और मातृत्व की प्रतीक हैं। पांचवें दिन देवी को मुख्य रूप से केला अर्पित किया जाता है। यह भोग परिवार की खुशहाली और संतान सुख के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

छठा दिन (मां कात्यायनी – शहद): युद्ध और पराक्रम की देवी मां कात्यायनी को छठे दिन शहद का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि शहद अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

सातवां दिन (मां कालरात्रि – गुड़): दुष्टों का संहार करने वाली और भय का नाश करने वाली मां कालरात्रि को सातवें दिन गुड़ या गुड़ से बनी चीजें अर्पित की जाती हैं। इससे साधक को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।

आठवां दिन (मां महागौरी – नारियल): पवित्रता और सौम्यता की मूरत महागौरी को अष्टमी के दिन नारियल का भोग लगाया जाता है। इस दिन कई घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है, जिसमें हलवा, पूरी और चने का प्रसाद विशेष रूप से बनता है।

नौवां दिन (मां सिद्धिदात्री – तिल): नवरात्रि के आखिरी दिन सभी सिद्धियां प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन देवी को तिल का भोग अर्पित किया जाता है, जो मोक्ष और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

भोग लगाते समय रखें इन बातों का विशेष ध्यान

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मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के प्रिय भोग

माता को प्रसाद अर्पित करते समय कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। भोग हमेशा पूर्ण पवित्रता, स्वच्छता और सात्विक तरीके से तैयार किया जाना चाहिए। देवी को भोग लगाने से पहले उसे रसोई के बर्तनों से निकालकर एक अलग और साफ पात्र में रखना चाहिए। यदि किसी विशेष दिन कोई निश्चित सामग्री उपलब्ध न हो, तो केवल ताजे फल या घर में बना शुद्ध सात्त्विक भोजन भी माता को समर्पित किया जा सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।