UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में बुधवार का दिन तबाही का पैगाम लेकर आया। प्रदेश के कई हिस्सों में आए भीषण आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को तहस-नहस कर दिया। राज्य के विभिन्न जिलों में पेड़ गिरने, दीवारें ढहने और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से अब तक 74 लोगों की मौत की खबर है। यह प्राकृतिक आपदा इतनी भीषण थी कि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन को अंदेशा है कि मलबे में दबे और अस्पताल में भर्ती लोगों की स्थिति देखते हुए मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचा तांडव
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह तबाही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय हुए एक शक्तिशाली चक्रवाती तंत्र और दक्षिण राजस्थान से आ रही नम पूरवा हवाओं के मेल का परिणाम थी। बुधवार दोपहर के बाद अचानक मौसम का मिजाज बदला और हवाओं की गति 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। धूल भरी आंधी ने देखते ही देखते पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया। दृश्यता शून्य हो गई और सड़कों पर चल रहे वाहन जहां-तहां रुक गए।
उन्नाव और प्रयागराज में ओलावृष्टि से भारी नुकसान
दोपहर के समय उन्नाव और प्रयागराज में प्रकृति का सबसे उग्र रूप देखने को मिला। तेज हवाओं के साथ बड़े आकार के ओले गिरे, जिससे फसलों और वाहनों को व्यापक क्षति पहुंची। कई स्थानों पर विशालकाय पेड़ उखड़कर बिजली की लाइनों और सड़कों पर खड़ी कारों पर गिर गए। बरेली और बदायूं जैसे जिलों में बड़े-बड़े साइन बोर्ड और यूनिपोल ताश के पत्तों की तरह ढह गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
मृतकों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: भदोही और प्रयागराज सबसे अधिक प्रभावित
इस आपदा में सबसे ज्यादा जनहानि प्रयागराज और भदोही जिलों में हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रयागराज में 17 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं। भदोही में 10, फतेहपुर में 8, उन्नाव में 7 और बदायूं में 6 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा सीतापुर, रायबरेली, हरदोई और झांसी समेत दर्जनों जिलों से लगातार दुखद खबरें आ रही हैं। प्रशासन हर जिले से विस्तृत रिपोर्ट जुटाने में लगा है।
प्रयागराज: तहसील स्तर पर तबाही का ब्योरा
प्रयागराज जिले की बात करें तो यहां सदर, हंडिया, फूलपुर, सोरांव और मेजा तहसील सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं। मरने वालों में 5 महिलाएं और 4 बच्चे शामिल हैं, जो कुदरत के इस कहर का सामना नहीं कर पाए। मानवीय क्षति के साथ-साथ जिले में 20 पशुओं की भी मौत हुई है और करीब 16 पक्के मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
उन्नाव में मासूमों पर गिरी गाज
उन्नाव में भी स्थिति हृदयविदारक रही। यहां एक 70 वर्षीय बुजुर्ग किसान की मौत पेड़ गिरने से हुई, तो वहीं आसीवन इलाके में महज 9 साल का मासूम ‘अंश’ पेड़ की चपेट में आने से जिंदगी की जंग हार गया। जिले में बिजली के खंभे गिरने से कई गांव अंधेरे में डूब गए हैं और सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
38 जिलों में मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’
उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में अभी खतरा टला नहीं है। मौसम विभाग ने लखनऊ, कानपुर, सीतापुर, बांदा और प्रतापगढ़ सहित कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। अगले 24 से 48 घंटों के दौरान 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम में पेड़ों और जर्जर इमारतों के नीचे शरण न लें।
15 मई से लू और भीषण गर्मी की वापसी
राहत की बात यह है कि पश्चिमी विक्षोभ का असर जल्द ही कम होगा, लेकिन इसके बाद नई चुनौती सामने आएगी। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, 15 मई से तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की भारी बढ़ोतरी होगी। प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री के पार जाने की उम्मीद है, जिससे भीषण लू (Heatwave) का प्रकोप शुरू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए तत्काल राहत के निर्देश
राज्य में मची इस तबाही पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और राहत कार्यों में तेजी लाएं। सरकार ने घोषणा की है कि मृतकों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी और घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। राजस्व विभाग को फसलों के नुकसान का सर्वे करने के भी आदेश दिए गए हैं।










