Shankaracharya Controversy: वाराणसी में शनिवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी पर 40 से अधिक मुकदमे दर्ज थे, जिन्हें सत्ता मिलने के बाद हटा दिया गया। स्वामी ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य वही व्यक्ति होता है जो धर्म और सत्य के लिए कार्य करता है, गायों और संस्कृति की रक्षा करता है।
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सनातन धर्म और शंकराचार्य का मापदंड
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “सनातन धर्म में शंकराचार्य वह व्यक्ति होता है जो सत्य बोलता है और धर्म की रक्षा करता है। किसी भी पद या सत्ता के लिए धर्म की उपेक्षा करना स्वीकार्य नहीं है। शंकराचार्य की परिभाषा केवल आधिकारिक पद नहीं, बल्कि नैतिक और धार्मिक कर्तव्य से जुड़ी है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य की परंपरा को बदलने की कोशिश की, जो पहले कभी नहीं हुई थी।
मुकदमों को हटाने पर सवाल

जानकारी के अनुसार स्वामी ने कहा, “मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी पर 40 से अधिक मुकदमे थे, लेकिन सत्ता मिलने के बाद ये सभी मुकदमे हटा दिए गए। क्या कानून में ऐसा लिखा है कि किसी बड़े पद पर पहुँचने के बाद मुकदमे हट जाएंगे? यह न्याय और कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।” स्वामी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि कानून के समान पालन की आवश्यकता है और किसी को भी पद के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
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CM योगी का जवाब और कानून पर जोर
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि हर व्यक्ति कानून के बराबर है और कोई भी शंकराचार्य की उपाधि का अनुचित उपयोग नहीं कर सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कार्यक्रमों में धार्मिक मर्यादा और कानून का पालन होना चाहिए।
योगी ने बताया कि 2015 में समाजवादी पार्टी के शासनकाल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर वाराणसी में लाठीचार्ज हुआ था और मुकदमे दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा, “यदि वह शंकराचार्य थे, तो उस समय उन पर लाठीचार्ज क्यों किया गया और मुकदमे दर्ज किए गए? कानून सभी के लिए समान है। हम मर्यादा में रहते हैं और कानून का पालन करना जानते हैं।”
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संगम तट पर रोक और विवाद
पुलिस ने माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद को संगम तट पर स्नान करने से रोक दिया था। पुलिस ने क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ बताया, जिसके कारण शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई। अंततः स्वामी ने स्नान करने से इंकार कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च है और हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता। योगी ने समाजवादी पार्टी को निशाना बनाते हुए कहा कि वे कानून और मर्यादा के भीतर रहते हुए ही कार्य करते हैं।









