Shankaracharya Notice: शंकराचार्य की मान्यता को लेकर छिड़ा विवाद, राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रेस नोट में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को शंकराचार्य लिखे जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया है।

Dharmendra Pradhan Resign

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 26, 2026

Shankaracharya Notice: अयोध्या में बने भव्य श्रीराम मंदिर की व्यवस्थाओं और आयोजनों की देखरेख करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, लेकिन इस बार वजह कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक बड़ा वैचारिक और प्रशासनिक विवाद है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की मान्यता को लेकर छिड़ी बहस ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक प्रेस नोट में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ‘शंकराचार्य’ के रूप में संबोधित किए जाने पर विवाद गहरा गया है, जिसके बाद ज्योतिष पीठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेज दिया है।

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ट्रस्ट के प्रेस नोट से भड़का विवाद

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से एक प्रेस नोट जारी किया गया। इस प्रेस विज्ञप्ति में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ‘ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य’ के रूप में उल्लेखित किया गया। इस पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गंभीर आपत्ति जताई है।

नोटिस के माध्यम से उन्होंने ट्रस्ट से स्पष्टीकरण मांगते हुए तीखे शब्दों में पूछा है कि आखिर किस आधार और अधिकार के तहत स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य माना गया है। सनातन धर्म की सर्वोच्च आध्यात्मिक पीठों की मान्यता और उनकी उत्तराधिकार परंपराओं से जुड़ा यह मामला अब संत समाज और कानूनी गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

संतों के बीच तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप

इस कानूनी नोटिस के सामने आने के बाद संत समाज के भीतर भी पक्ष और विपक्ष में बंटाव साफ नजर आने लगा है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राम कथा कुंज के पीठाधीश और प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत डॉ. रामानंद दास ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के उठाए गए कदमों और दावों पर तीखा हमला बोला है।

स्वामी वासुदेवानंद को बताया मूल शंकराचार्य: संत डॉ. रामानंद दास ने दावा किया है कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ही ज्योतिष पीठ के वास्तविक और मूल शंकराचार्य हैं। उनके अनुसार, परंपरा और नियमों के मुताबिक मूल पीठ पर उनका ही अधिकार है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर व्यक्तिगत टिप्पणी: डॉ. रामानंद दास ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें “बड़बोला” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मूल पीठ पर विराजमान नहीं हैं, बल्कि वे एक अलग स्थान पर अपना मठ और व्यवस्था संचालित कर रहे हैं।

दावों से स्थिति न बदलने का तर्क: संत समाज के एक धड़े का मानना है कि इस तरह के बयानों और कानूनी नोटिस से सनातन परंपरा की मूल व्यवस्था और स्थापित मान्यताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

सनातन धर्म और पीठों की सर्वोच्चता पर सवाल

यह विवाद केवल एक प्रेस नोट की शब्दावली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के चार प्रमुख मठों और उनकी पीठों पर उत्तराधिकार के संवेदनशील मुद्दों को भी हवा दे रहा है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित इन महान पीठों की पवित्रता और उनके आचार्यों की वैधता को लेकर समय-समय पर इस तरह के वैचारिक मतभेद सामने आते रहे हैं।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कानूनी नोटिस का क्या जवाब देता है। इस नोटिस के बाद अयोध्या से लेकर देश के अन्य धार्मिक केंद्रों तक हलचल तेज हो गई है, और आने वाले दिनों में यह विवाद संत समाज के बीच और अधिक तूल पकड़ सकता है।

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