Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का योगी सरकार पर पलटवार ‘CM दें अपने हिंदू होने का सबूत’

वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रशासन द्वारा मांगे गए 'शंकराचार्य प्रमाण पत्र' पर पलटवार करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सीएम योगी स्वयं के 'हिंदू' होने का प्रमाण दें। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौरक्षा और धार्मिक निष्ठा को असली हिंदुत्व की कसौटी बताया है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 30, 2026

Shankaracharya Controversy: वाराणसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं, जो सीधे तौर पर धर्म सत्ता का अपमान है।

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प्रशासनिक नोटिस और शंकराचार्य की प्रमाणिकता पर विवाद

शंकराचार्य ने बताया कि हाल ही में प्रशासन की ओर से उनसे उनके शंकराचार्य होने का साक्ष्य मांगा गया था। उन्हें 24 घंटे के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया गया और चेतावनी दी गई कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्हें माघ मेले में प्रवेश से वंचित किया जा सकता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “हमने निर्धारित समय में अपना पक्ष रख दिया है। प्रशासन ने अभी तक हमारे जवाब का खंडन नहीं किया है, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि वे हमारी बात की सत्यता को स्वीकार कर चुके हैं।”

कुंभ और माघ मेले में प्रवेश को लेकर खींचतान

प्रयागराज स्नान और मेले में सुविधाओं के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अब मुद्दा केवल स्नान का नहीं रह गया है। उनके अनुसार, विवाद अब ‘असली बनाम नकली हिंदू’ की बहस पर टिक गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पर्दे के पीछे से कई बातें कहने की कोशिश की, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। शंकराचार्य ने इसे सनातन धर्म के ध्वजवाहकों को दबाने की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया।

धर्म सत्ता और राज सत्ता के बीच बढ़ता टकराव

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक आधिकारिक पत्र जारी करते हुए कहा कि वर्तमान समय धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा का दौर है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जिस तरह पूर्व में स्वामी करपात्री जी महाराज जैसे महान सनातनियों पर अत्याचार किए गए, आज वही स्थिति गोभक्तों और उनके समर्थकों के साथ दोहराई जा रही है। उन्होंने सत्ता पर धर्म के कार्यों में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रामभद्राचार्य पर गंभीर आरोप

शंकराचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए कहा कि उनकी छवि को जनता के बीच धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ अपने विश्वासपात्रों, जैसे जगद्गुरु रामभद्राचार्य, के माध्यम से इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने इसे सनातन समाज को विभाजित करने की साजिश बताया, लेकिन साथ ही यह भी संकल्प लिया कि वे गौरक्षा के अपने पथ से विचलित नहीं होंगे।

‘हिंदू होने का प्रमाण दें मुख्यमंत्री’

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री जी, आपने हमसे हमारे पद का प्रमाण मांगा, जो हमने दे दिया। अब पूरे सनातनी समाज की ओर से मैं आपसे आपके ‘हिंदू’ होने का प्रमाण मांगता हूँ।” उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू होना केवल भगवा वस्त्र पहनने या भाषण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी असली कसौटी गो-सेवा और धर्म-रक्षा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब सत्ता को अपनी धार्मिक निष्ठा सिद्ध करनी होगी।

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