Shankaracharya Avimukteshwaranand saraswati Death Threat: सनातन धर्म के प्रमुख ध्वजवाहक और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उन्हें माफिया डॉन अतीक अहमद की तर्ज पर लाइव कैमरे और पुलिस सुरक्षा के बीच सरेआम मौत के घाट उतारने की धमकी दी गई है। इस गंभीर घटना के बाद उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। ज्योतिर्मठ के आधिकारिक संचार माध्यमों पर जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से संदेश भेजे गए हैं, वह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
डिजिटल माध्यमों से मिली जानलेवा धमकी
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, इस पूरे मामले की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को हुई, जब शंकराचार्य के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर लगातार अपमानजनक टेक्स्ट मैसेज (Abusive Messages) प्राप्त हुए। इन संदेशों में बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और उन्हें चेतावनी दी गई कि उनका अंत भी अतीक अहमद जैसा ही होगा। जब उस नंबर को ब्लॉक कर दिया गया, तो आरोपी ने हार नहीं मानी और 6 अप्रैल को फिर से संपर्क साधा। इस बार आरोपी ने दो ऑडियो संदेश (Voice Mails) भेजे, जो दोपहर 1:55 और 1:57 बजे प्राप्त हुए। इन वॉयस क्लिप्स में बहुत ही हिंसक और डरावने लहजे में हत्या की बात दोहराई गई है।
प्रयागराज माघ मेले का पुराना विवाद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन के साथ टकराव का इतिहास (History of Conflict) काफी चर्चित रहा है। इस विवाद की जड़ें प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ी हैं, जहाँ मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य के काफिले और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि प्रशासन ने उन्हें ‘शंकराचार्य’ पदवी का उपयोग न करने का नोटिस तक दे दिया। इसी दौरान उन पर और उनके आश्रम पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत गंभीर आरोप लगे और एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है, लेकिन उनके विरोधी इसे पाखंड के खिलाफ लड़ाई बता रहे हैं।
छात्र राजनीति से ज्योतिष पीठ के सिंहासन तक का संघर्षपूर्ण सफर
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भी रहा है। वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के दौरान वे छात्र संघ अध्यक्ष (Student Union President) रहे, जो उनके प्रखर नेतृत्व को दर्शाता है। 2003 में दंड संन्यास की दीक्षा लेने के बाद वे अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने गए। चाहे राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की शास्त्रीय विधि हो या ‘गौ माता-राष्ट्रमाता’ अभियान, वे हमेशा प्रखर धार्मिक आवाज (Bold Religious Voice) बनकर उभरे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी इसी निर्भीक छवि को धूमिल करने के लिए ये धमकियां और कानूनी अड़चनें पैदा की जा रही हैं।
आशुतोष ब्रह्मचारी बनाम शंकराचार्य
इस पूरे विवाद के केंद्र में आशुतोष ब्रह्मचारी (आशुतोष पांडेय) हैं, जो जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य और कृष्ण जन्मभूमि विवाद के प्रमुख वादी हैं। वे शंकराचार्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। दिलचस्प और डरावना पहलू यह है कि आशुतोष ब्रह्मचारी को भी धमकी (Threat to Petitioner) मिली है, जिसमें उन्हें बम से उड़ाने की बात कही गई है। पुलिस जांच में वह धमकी भरा नंबर पाकिस्तान का निकला है, जिससे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय साजिश की बू आ रही है।
अतीक अहमद कांड का खौफनाक संदर्भ
शंकराचार्य को दी गई धमकी में जिस ‘अतीक कांड’ का जिक्र है, वह 15 अप्रैल 2023 की वह खौफनाक रात है जब प्रयागराज में अतीक और अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या (Custodial Murder) कर दी गई थी। लाइव टीवी कैमरों के सामने हुई उस हत्या का उदाहरण देकर शंकराचार्य को डराना, सुरक्षा तंत्र के लिए एक खुली चुनौती है। वर्तमान में, स्वामी जी की विधिक टीम औपचारिक शिकायत दर्ज करा रही है, वहीं शासन की ओर से उनकी सुरक्षा व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण (Security Strengthening) करने की मांग भी तेज हो गई है।
शंकराचार्य जैसे उच्च पदस्थ धर्मगुरु को मिली यह धमकी केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरी कानून व्यवस्था को दी गई चुनौती है। अब देखना यह है कि एजेंसियां कितनी जल्दी इस साजिश के मूल तक पहुँच पाती हैं।










