शनि ढैय्या 2026: सिंह और धनु राशि पर जारी रहेगा असर

ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय का देवता और सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है. शनि एक राशि में करीब ढाई वर्ष तक रहते हैं. जब शनि किसी राशि के चौथे या आठवें भाव में आते हैं, तो उस राशि पर शनि ढैय्या शुरू हो जाती है, जिसका असर जीवन के कई पहलुओं पर देखने को मिलता है. फिलहाल शनि मीन राशि में विराजमान हैं और साल 2026 में भी इसी राशि में रहेंगे. इस गोचर के कारण सिंह और धनु राशि के जातक शनि ढैय्या के प्रभाव में हैं. यह स्थिति इन दोनों राशियों के

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Published On :

जून 9, 2026

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ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय का देवता और सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है. शनि एक राशि में करीब ढाई वर्ष तक रहते हैं. जब शनि किसी राशि के चौथे या आठवें भाव में आते हैं, तो उस राशि पर शनि ढैय्या शुरू हो जाती है, जिसका असर जीवन के कई पहलुओं पर देखने को मिलता है. फिलहाल शनि मीन राशि में विराजमान हैं और साल 2026 में भी इसी राशि में रहेंगे. इस गोचर के कारण सिंह और धनु राशि के जातक शनि ढैय्या के प्रभाव में हैं. यह स्थिति इन दोनों राशियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

कब शुरू हुई और कब खत्म होगी शनि ढैय्या?
सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या की शुरुआत 29 मार्च 2025 से हो चुकी है. इन राशियों को 3 जून 2027 के बाद अस्थायी राहत मिलेगी. हालांकि, 20 अक्टूबर 2027 से 23 फरवरी 2028 तक ढैय्या का प्रभाव एक बार फिर लौटेगा. इसके बाद ही पूरी तरह से शनि ढैय्या समाप्त मानी जाएगी.

शनि ढैय्या के दौरान क्या होता है असर
ज्योतिष के अनुसार, इस अवधि में व्यक्ति को कामकाज में रुकावट, आर्थिक उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य समस्याएं और रिश्तों में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, यह समय व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और कर्म के महत्व को समझने का भी अवसर देता है.

शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय
शनि मंत्र और चालीसा का जाप
रोजाना या शनिवार के दिन 'ऊं शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें और शनि चालीसा का पाठ करें. इससे मानसिक शांति मिलती है और शनि की कृपा बनी रहती है.

शनिवार को दान करना
शनिवार के दिन काला तिल, काले वस्त्र, उड़द दाल या सरसों के तेल का दान करना शुभ माना जाता है. यह उपाय शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में मदद करता है.

हनुमान जी की पूजा
हनुमान जी की नियमित आराधना करें. मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से शनि का कष्ट कम होता है, इसलिए मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी रहता है.

पीपल के वृक्ष की पूजा
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें. यह उपाय शनि दोष शांत करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है.

शिवलिंग पर जल अर्पित करें
प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना भी शनि के प्रभाव को संतुलित करता है. भगवान शिव की कृपा से जीवन में स्थिरता आती है.

पशु-पक्षियों को भोजन कराएं
कौवों, कुत्तों और जरूरतमंद पशु-पक्षियों को भोजन खिलाना पुण्यदायी माना जाता है और इससे शनि के कष्ट कम होते हैं.

जरूरतमंदों की सहायता करें
गरीबों, बुजुर्गों और असहाय लोगों की मदद करें. शनि कर्म के देवता हैं, इसलिए अच्छे कर्म करने से उनके अशुभ प्रभाव स्वतः कम होने लगते हैं.

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